Wednesday, January 21

शेयर बाजार में फिर आई गिरावट, निवेशकों के लिए अवसर है बिजनेस साइकल फंड

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 21 जनवरी 2026 को फिर गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 281 अंक टूटकर 81,910 अंक पर बंद हुआ। लगातार तीसरे दिन बाजार में उतार-चढ़ाव से निवेशकों के करीब 15 लाख करोड़ रुपये का मूल्य कम हो गया। ऐसे समय में विशेषज्ञ निवेशकों को बिजनेस साइकल फंड में निवेश करने की सलाह दे रहे हैं।

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इस साल बाजार में 3.85% की गिरावट
इस साल 2 जनवरी को बीएसई सेंसेक्स 85,262.01 अंक पर था, जबकि आज यह 81,909.63 अंक पर बंद हुआ। यानी केवल तीन सप्ताह में बाजार में 3.77 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। लगातार गिरते बाजार के बीच यह समझना जरूरी है कि म्यूचुअल फंड और शेयर निवेशकों के लिए इस समय कौन से विकल्प उपयुक्त हैं।

बिजनेस साइकल फंड क्यों खास हैं
विशेषज्ञों के अनुसार, बिजनेस साइकल फंड आर्थिक चक्र के उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए निवेश करते हैं। यह फंड पोर्टफोलियो को अर्थव्यवस्था के सुधार, विस्तार, मंदी और कमजोरी के अनुसार बदलते हुए क्षेत्रों में निवेश करता है। स्थिर अलोकेशन पर टिके रहने के बजाय, यह आर्थिक संकेतों के आधार पर क्षेत्रीय निवेश को सक्रिय रूप से समायोजित करता है।

किसके लिए हैं मुफीद
म्यूचुअल फंड विशेषज्ञ रवि राजकुमार करीरा बताते हैं कि ये फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर हैं जिनकी जोखिम लेने की क्षमता अधिक है, निवेश की अवधि तीन से पांच वर्ष है और जो प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव को सह सकते हैं। ICICI प्रूडेंशियल बिजनेस साइकल फंड जैसे पेशेवर रूप से प्रबंधित फंड ने पिछले तीन वर्षों में 21.66% की CAGR और स्थापना से 28 नवंबर 2025 तक 21.58% की CAGR रिटर्न दिया है।

फंड कैसे काम करता है
बिजनेस साइकल फंड का दृष्टिकोण आर्थिक चक्र के प्रत्येक चरण को ध्यान में रखते हुए तय किया जाता है। फंड मैनेजर ब्याज दरों, मुद्रास्फीति, राजकोषीय और पूंजीगत खर्च के संकेतों के साथ-साथ PMI और व्यावसायिक विश्वास जैसे संकेतकों को भी देखते हैं। इससे वे यह तय कर पाते हैं कि कौन से क्षेत्र लाभकारी हैं और किन क्षेत्रों से दूरी बनानी चाहिए।

आर्थिक चक्र के चार चरण और उपयुक्त क्षेत्र

  1. रिकवरी (Recovery): मंदी के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार होता है। बैंकिंग, रियल एस्टेट और पूंजीगत वस्तुएं लाभकारी होती हैं।
  2. विस्तार (Expansion): विकास के दौर में कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी गुड्स, ऑटोमोबाइल, एनर्जी और मेटल्स क्षेत्र बढ़त में रहते हैं।
  3. स्लोडाउन/रिसेशन (Slowdown/Recession): मांग कमजोर होने पर कंज्यूमर गुड्स, फार्मा और आईटी क्षेत्र स्थिरता प्रदान करते हैं।
  4. मंदी (Slump): अर्थव्यवस्था की कमजोरी में यूटिलिटी, हेल्थ सर्विसेज और मजबूत कंपनियां सुरक्षित विकल्प होती हैं।

फंड मैनेजर की जिम्मेदारी
फंड मैनेजर आर्थिक संकेतों के आधार पर क्षेत्रों का चयन करते हैं और पोर्टफोलियो को आर्थिक बदलावों के अनुरूप ढालते हैं। यह रणनीति निवेशकों को जोखिम प्रबंधन के साथ उच्च प्रतिफल देने का अनुशासित तरीका प्रदान करती है।

 

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