Thursday, January 22

भ्रम फैलाने वालों को मिला करारा जवाब यूसीसी की सफलता और गोपनीयता पर बोले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम और आशंकाओं पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त और स्पष्ट जवाब दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते एक वर्ष में यूसीसी के तहत पांच लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन निजता उल्लंघन की एक भी शिकायत सामने नहीं आई। यह अपने आप में इस व्यवस्था की सफलता और पारदर्शिता का प्रमाण है।

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मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर शुरुआत में कुछ लोगों ने जानबूझकर नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया, लेकिन एक साल का सफल क्रियान्वयन ऐसे सभी दावों और आशंकाओं का करारा जवाब बनकर सामने आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूसीसी नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा और गोपनीयता के अपने संकल्प पर शत प्रतिशत खरी उतरी है

फेसलेस प्रक्रिया, घर बैठे आवेदन

मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता के तहत लगभग शत प्रतिशत आवेदन यूसीसी पोर्टल के माध्यम से किए जा रहे हैं। इस ऑनलाइन और फेसलेस प्रक्रिया के कारण आवेदकों को किसी भी सरकारी कार्यालय या अधिकारी के सामने उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं पड़ती। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि आवेदक की पहचान सार्वजनिक होने का कोई खतरा भी नहीं रहता

मजबूत सुरक्षा व्यवस्था

सीएम धामी ने कहा कि यूसीसी पोर्टल में नागरिकों की निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए मजबूत तकनीकी सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि एक बार आवेदन सक्षम स्तर के अधिकारी द्वारा स्वीकृत हो जाने के बाद, संबंधित अधिकारी भी आवेदक की निजी जानकारी नहीं देख सकता।

आवेदन के साथ दी गई व्यक्तिगत जानकारी तक केवल आवेदक की ही पहुंच होती है, जो निर्धारित वैरिफिकेशन प्रक्रिया के तहत आवश्यक जानकारी देख सकता है। यही वजह है कि अब तक निजता उल्लंघन की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है।

गुड गवर्नेंस का उदाहरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में यूसीसी की प्रक्रिया जिस सरलता, पारदर्शिता और तेजी से पूरी की जा रही है, वह गुड गवर्नेंस का उत्कृष्ट उदाहरण है। औसतन पांच दिनों में प्रमाणपत्र जारी होने से आम नागरिकों का समय और संसाधन दोनों बच रहे हैं।

बढ़ता भरोसा, बढ़ता उपयोग

वर्तमान में लोग यूसीसी के तहत विवाह पंजीकरण, विवाह विच्छेद, वसीयत पंजीकरण, लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और उनके समापन जैसे प्रावधानों का तेजी से उपयोग कर रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि जनता का इस व्यवस्था पर भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है।

निष्कर्षतः, उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता न केवल प्रशासनिक सुधार का मॉडल बनकर उभरी है, बल्कि गोपनीयता, पारदर्शिता और नागरिक सुविधा के मामले में भी एक नई मिसाल कायम कर रही है।

 

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