
नई दिल्ली: अमेरिका समेत पश्चिमी देशों द्वारा रूसी तेल पर बैन लगाए जाने के बाद रूस को बड़ा आर्थिक झटका लगने लगा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई 46% तक गिर सकती है। इस महीने रूस से भारत का तेल आयात भी पिछले तीन सालों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है, जिससे रूस की कमाई पर और दबाव पड़ा है।
तेल निर्यात में कमी:
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार 18 जनवरी को खत्म हुए चार हफ्तों में रूस ने औसतन 31.6 लाख बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन भेजा, जो अगस्त 2025 के बाद सबसे कम है।
क्रिसमस से पहले के मुकाबले यह निर्यात 7 लाख बैरल प्रतिदिन कम हो गया है।
11 जनवरी को खत्म हुए हफ्ते के मुकाबले निर्यात 2.6 लाख बैरल प्रति दिन घटा।
भारत की भूमिका:
भारत रूस का एक बड़ा तेल खरीदार है, लेकिन दिसंबर 2025 में उसने रूस से तेल खरीदना काफी कम कर दिया। इससे रूस की आय में कमी आई है। भारतीय खरीदारों ने विशेष रूप से रोसनेफ्ट और लुकोइल के तेल पर निर्भरता घटाई और अन्य ट्रेडिंग कंपनियों से सप्लाई सुनिश्चित की।
रूस की कमाई पर असर:
जनवरी में रूस को तेल और गैस से मिलने वाली कमाई लगभग 420 अरब रूबल (करीब 490 अरब रुपये) रह सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होने और रूबल की मजबूती के कारण रूस की आय प्रभावित हुई। दिसंबर 2025 में रूबल पिछले साल के मुकाबले 30% मजबूत हुआ, जिससे तेल की रूबल में कीमत में 53% तक कमी आई।
बजट में तेल और गैस का हिस्सा:
रूस के संघीय बजट का लगभग 25% हिस्सा तेल और गैस इंडस्ट्री से आता है।
इस साल तेल और गैस से कमाई की अनुमानित राशि 8.96 ट्रिलियन रूबल है, जबकि पिछले साल यह 8.48 ट्रिलियन रूबल थी।
हालांकि पिछले साल की तुलना में यह 24% कम थी।
विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी बैन और भारत जैसी बड़ी मार्केट्स की खरीद में कमी के चलते रूस की तेल अर्थव्यवस्था पर गंभीर दबाव है। इस समय रूस नए खरीदार और सप्लाई चैनल तलाशने में जुटा है, ताकि आर्थिक नुकसान को कम किया जा सके।