Wednesday, January 21

अडानी ग्रुप के शेयरों में एलआईसी ने घटाई हिस्सेदारी, GQG ने की मुनाफावसूली

 

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नई दिल्ली: अडानी ग्रुप के शेयर पिछले साल मजबूत प्रदर्शन करने के बावजूद दिसंबर तिमाही में प्रमुख निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी में फेरबदल किया है। देश के सबसे बड़े घरेलू संस्थागत निवेशक भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) ने अडानी ग्रुप की दो कंपनियों में हिस्सेदारी घटाई, जबकि GQG ने कुछ शेयरों में मुनाफावसूली की। वहीं म्यूचुअल फंड और विदेशी निवेशकों (FII) ने भी पोर्टफोलियो में बदलाव किया।

 

एलआईसी की स्थिति:

 

अडानी एंटरप्राइजेज में एलआईसी की हिस्सेदारी 52 आधार अंक घटकर 3.64% रह गई।

अडानी पोर्ट्स में हिस्सेदारी 7.73% से घटकर 6.79% हुई।

ACC में निवेश बढ़कर 10.51% हो गया।

अडानी एनर्जी, अडानी ग्रीन, अडानी टोटल गैस और अंबुजा सीमेंट में हिस्सेदारी स्थिर रही।

 

GQG का पोर्टफोलियो:

 

अडानी पोर्ट्स में हिस्सेदारी 3.49% से घटकर 2.27% हुई।

अडानी पावर में हिस्सेदारी मामूली घटकर 1.53% रह गई।

इसके अलावा FII के पास अडानी एनर्जी, अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी ग्रीन में भी हिस्सेदारी है।

 

एफआईआई और म्यूचुअल फंड की गतिविधि:

 

अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स, अडानी टोटल गैस, अंबुजा सीमेंट और एनडीटीवी में एफआईआई की हिस्सेदारी घट गई।

ACC में एफआईआई की हिस्सेदारी बढ़कर 5.99% हुई।

म्यूचुअल फंड ने एसीसी और अडानी पोर्ट्स में मुनाफा कमाया, जबकि अडानी एनर्जी, एंटरप्राइजेज, ग्रीन, पावर, टोटल गैस और अंबुजा सीमेंट में हिस्सेदारी बढ़ाई।

 

अडानी ग्रुप की सालाना उपलब्धियाँ:

 

2025 में समूह का बाजार पूंजीकरण 10.6% बढ़कर 14.6 लाख करोड़ रुपये हुआ।

अडानी पोर्ट्स, अडानी पावर और अडानी एनर्जी के शेयरों में 35% तक तेजी देखी गई।

वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में EBITDA ऑल-टाइम हाई 47,375 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

ग्रुप का ROA 15.1% रहा, जो बुनियादी ढांचा क्षेत्र में दुनिया के उच्चतम ROA में से एक है।

 

विश्लेषक टिप्पणी: विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों का यह फेरबदल बाजार की मौजूदा स्थिति और मुनाफावसूली की रणनीतियों को दर्शाता है, जबकि एलआईसी और GQG जैसी संस्थागत कंपनियों का भरोसा अडानी ग्रुप की लंबी अवधि की क्षमता को उजागर करता है।

 

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