
नई दिल्ली, 21 जनवरी 2026 – अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के जनरल सर्जरी विभाग ने रोबॉटिक सर्जरी के क्षेत्र में इतिहास रच दिया है। 5 नवंबर 2024 से शुरू हुई इस तकनीक की मदद से अब तक 13 महीनों में 1000 से अधिक सफल सर्जरी की जा चुकी हैं।
एम्स के डॉक्टर सुनील चुंबर ने बताया कि शुरुआत में केवल एक फैकल्टी रोबॉटिक सर्जरी में प्रशिक्षित थी, लेकिन अब सभी 25 फैकल्टी रोबॉट की मदद से सर्जरी कर रहे हैं। रोबॉटिक सर्जरी से मरीजों को छोटा चीरा, कम दर्द, तेज रिकवरी और अस्पताल से जल्दी छुट्टी जैसी सुविधा मिल रही है। यह सेवा प्राइवेट अस्पतालों में लाखों रुपये में होने वाली सर्जरी की तुलना में एम्स में मुफ्त उपलब्ध है।
सबसे ज्यादा गॉल ब्लैडर और हर्निया सर्जरी
डॉक्टर हेमांग भट्टचार्जी ने बताया कि गॉल ब्लैडर स्टोन और हर्निया की सर्जरी सबसे ज्यादा की गई हैं। इसके अलावा 14 किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। कुछ मामलों में मरीज को एक ही दिन में अस्पताल से छुट्टी मिल रही है।
जटिल सर्जरी में भी रोबॉट का इस्तेमाल
रोबॉट की मदद से पैक्रियाटिक ड्यूडेनक्टॉमी, गैस्ट्रेक्टॉमी, इसोफैजेक्टॉमी, कोलेक्टॉमी, एंटीरियर रिसेक्शन (जीआई कैसर), जटिल हर्निया की एब्डॉमिनल वॉल रिकंस्ट्रक्शन, किडनी ट्रांसप्लांट, थायरॉइड, पैराथायरॉइड, एड्रिनल और पैक्रियास के एंडोक्राइन ट्यूमर जैसी सर्जरी भी की जा रही हैं। रोबॉटिक आर्म्स की मदद से ऑपरेशन क्षेत्र का विस्तृत और स्पष्ट दृश्य मिलता है और बेहद बारीक मूवमेंट संभव होता है, जिससे ब्लीडिंग कम होती है और जटिलताओं की आशंका घटती है।
देश के लिए ब्लूप्रिंट
एम्स का यह मॉडल दूसरे केंद्रीय और राज्य स्तरीय अस्पतालों के लिए ब्लूप्रिंट बन सकता है। रोबॉटिक सर्जरी में हर साल 15 से 20 प्रतिशत वृद्धि हो रही है और अभी देशभर में 200 से अधिक सर्जिकल रोबॉट कार्यरत हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तकनीक से हेल्थकेयर सिस्टम पर बोझ कम होगा और मरीजों को ग्लोबल स्टैंडर्ड की सुविधाएँ मुफ्त मिलेंगी।