
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने जनगणना की प्रक्रिया को प्रभावी और व्यवस्थित बनाने के लिए नई अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि जनगणना में किसी भी प्रकार की बाधा डालने या लापरवाही करने पर 3 साल तक की जेल और 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
शासन ने मंगलवार को यह अधिसूचना जारी कर मंडल, जिला, तहसील और नगर निकाय स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर दी है। अधिसूचना में विशेष रूप से जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 11 का उल्लेख किया गया है, जो जनगणना में बाधा डालने पर दंड का प्रावधान करती है।
प्रदेश में मई-जून में हाउस सर्वे का काम होगा, जिसमें प्रगणक घर-घर जाकर परिवार और संसाधनों से जुड़ी जानकारी एकत्र करेंगे। इससे पहले कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।
अधिकारियों की जिम्मेदारी तय
अधिसूचना के अनुसार, कमिश्नर मंडल जनगणना अधिकारी, जिला मजिस्ट्रेट प्रमुख जनगणना अधिकारी और एडीएम (वित्त एवं राजस्व) जिला जनगणना अधिकारी होंगे। बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी और जिला पंचायतराज अधिकारी को अपर जिला जनगणना अधिकारी बनाया गया है। एसडीएम उप जनगणना अधिकारी, तहसीलदार चार्ज अफसर और कानूनगो सहायक चार्ज अफसर होंगे। नगर निगम, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायत, छावनी परिषद और औद्योगिक विकास प्राधिकरणों में भी जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय की गई है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना की सफलता और सटीक आंकड़े सुनिश्चित करने के लिए सभी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाएं।