
इस्लामाबाद/नई दिल्ली: भारत द्वारा फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। समाचार एजेंसी ANI के अनुसार, करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस महा-सौदे पर अगले महीने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के दौरान हस्ताक्षर हो सकते हैं।
भारत के इस कदम को पाकिस्तान के रक्षा विशेषज्ञों ने अपनी वायुसेना के लिए गंभीर चुनौती बताया है। पाकिस्तान के चर्चित डिफेंस एनालिस्ट बिलाल खान ने कहा है कि भारतीय वायुसेना में 114 अत्याधुनिक राफेल विमानों की एंट्री केवल संख्या का सवाल नहीं है, बल्कि यह ऑपरेशनल क्षमता, नेटवर्क इंटीग्रेशन और युद्धक प्रभुत्व का बड़ा संकेत है।
राफेल सिर्फ फाइटर नहीं, पूरा युद्धक इकोसिस्टम
बिलाल खान के अनुसार, राफेल को हल्के में लेना रणनीतिक भूल होगी। उन्होंने कहा,
“राफेल महज एक लड़ाकू विमान नहीं है, बल्कि यह सेंसर, हथियार प्रणालियों और डेटा-लिंक से जुड़े एक व्यापक इकोसिस्टम का हिस्सा है। इसकी ताकत अकेले विमान में नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क में छिपी है।”
उन्होंने बताया कि एक ही आधुनिक मल्टीरोल फाइटर प्लेटफॉर्म पर आधारित भारतीय वायुसेना की संरचना से ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स, मेंटेनेंस और ऑपरेशनल डॉक्ट्रिन में जबरदस्त सुधार होगा। इससे भारत लंबे समय से चली आ रही फाइटर स्क्वाड्रन की कमी से भी बाहर निकल सकेगा।
200 राफेल और 100 से ज्यादा तेजस से बदलेगा संतुलन
पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने चेतावनी दी कि भविष्य में अगर भारतीय वायुसेना के पास करीब 200 राफेल, 100 से अधिक तेजस और उन्नत Su-30MKI जैसे प्लेटफॉर्म होंगे, तो यह पाकिस्तान को अपने हवाई युद्ध सिद्धांतों पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर देगा।
उनके अनुसार, ऐसी ताकत भारत को एयर डिफेंस, डीप स्ट्राइक और आक्रामक काउंटर-एयर मिशनों में बेहद गहराई, सहनशक्ति और लचीलापन देगी।
J-35 भी राफेल का तोड़ नहीं
भारत के राफेल बेड़े को संतुलित करने के लिए चीन से J-35 स्टील्थ फाइटर खरीदने के विचार को भी बिलाल खान ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान J-35 खरीदता भी है, तो वह राफेल का सीधा जवाब नहीं होगा।
उनका कहना है कि J-35 को अधिकतम एक डीप-स्ट्राइक स्टील्थ प्लेटफॉर्म के रूप में देखा जा सकता है, न कि राफेल जैसे संपूर्ण युद्धक सिस्टम के मुकाबले के तौर पर।
पाकिस्तान को बदलेगी रणनीति
बिलाल खान ने साफ कहा कि पाकिस्तान, लड़ाकू विमानों की संख्या के आधार पर भारतीय वायुसेना की बराबरी नहीं कर सकता। ऐसे में उसे एक अलग रणनीति अपनानी होगी।
उन्होंने पाकिस्तान को एयर डिफेंस नेटवर्क मजबूत करने, आधुनिक AESA रडार, लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों, बड़ी संख्या में JF-17, साथ ही ड्रोन (UAV) युद्ध और लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता पर ध्यान देने की सलाह दी।