
जबलपुर (एमपी): मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ‘तृतीय श्रेणी सरकारी कर्मचारी’ का दर्जा देकर समान वेतन और सभी सरकारी सुविधाएं देने की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह में जवाब देने के निर्देश दिए हैं।
याचिका का विवरण
हाईकोर्ट जबलपुर में मध्य प्रदेश आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की महासचिव संगीता श्रीवास्तव ने याचिका दायर की थी। इसमें मांग की गई थी कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को समान काम के लिए समान वेतनमान के तहत तृतीय श्रेणी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। याचिका में कहा गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और सामाजिक कल्याण योजनाओं का संचालन कर रही हैं और राज्य शासन द्वारा उन्हें अतिरिक्त कार्यबल के रूप में बीएलओ, जनगणना जैसे अन्य कर्तव्यों का भी जिम्मा दिया जाता है।
सालों से नियमित कैडर नहीं, शोषण जारी
याचिकाकर्ता का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दशकों से राज्य को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। हालांकि राज्य उन्हें नियमित कैडर में शामिल नहीं करता, जिससे उनके साथ शोषण हो रहा है। याचिका में राहत की मांग की गई है कि इन्हें नियमित कैडर, समान वेतन और सभी सरकारी लाभों के हकदार माना जाए।
हाईकोर्ट की कार्रवाई
जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने याचिका स्वीकार करते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद अली और अहमद साजिद हुसैन ने याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद तय की गई है, जिसमें सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के नियमितीकरण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।