
नई दिल्ली।
न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सरजमीं पर पहली बार वनडे सीरीज गंवाने के बाद भारतीय क्रिकेट में मंथन तेज हो गया है। तीन मैचों की सीरीज में पहला मुकाबला जीतने के बावजूद टीम इंडिया 1-2 से सीरीज हार गई, जिसने चयन समिति और टीम मैनेजमेंट को कड़े फैसले लेने के लिए मजबूर कर दिया है। इस बदलाव की आहट खुद वनडे कप्तान शुभमन गिल के बयानों से साफ सुनाई दे रही है।
गिल के संकेतों पर गौर करें तो अगली वनडे सीरीज में इंदौर में खेले कई चेहरे टीम से गायब हो सकते हैं। हार के बाद कप्तान का लहजा साफ बताता है कि अब प्रदर्शन नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी प्राथमिकता बनेगी।
2027 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखकर बनेगी नई टीम
शुभमन गिल ने पोस्ट-मैच बयान में स्पष्ट किया कि टीम इंडिया अब 2027 वनडे विश्व कप को केंद्र में रखकर आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि भारत के पास सीमित मौके हैं और अगले वर्ल्ड कप से पहले सिर्फ 17 वनडे मुकाबले ही खेले जाने हैं। ऐसे में प्रयोग और सही संयोजन तलाशना अनिवार्य हो गया है।
गिल ने कहा,
“वर्ल्ड कप हमारे दिमाग में है। हम नीतीश कुमार रेड्डी को मौके देना चाहते हैं। उन्हें पर्याप्त ओवर देकर देखना चाहते हैं कि कौन-सा कॉम्बिनेशन हमारे लिए काम करता है और किस तरह की गेंदबाजी सबसे प्रभावी रहती है।”
यह बयान साफ करता है कि आने वाली सीरीज में युवा खिलाड़ियों को ज्यादा मौके मिल सकते हैं और कुछ स्थापित नामों को बाहर बैठना पड़ सकता है।
रोहित शर्मा सुरक्षित, जडेजा की कुर्सी डगमगाई
तीनों मैचों में बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे रोहित शर्मा को लेकर फिलहाल कोई खतरा नजर नहीं आ रहा है। गिल ने उनका बचाव करते हुए कहा कि ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हालिया सीरीज में रोहित शानदार फॉर्म में थे और हर शुरुआत को बड़ी पारी में बदल पाना संभव नहीं होता।
हालांकि रवींद्र जडेजा के लिए तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आ रही है। लगातार मैचों में न तो विकेट और न ही बल्ले से प्रभाव छोड़ पाने वाले जडेजा की वनडे टीम में जगह अब संकट में दिख रही है। गिल ने भले ही उनका नाम सीधे न लिया हो, लेकिन हालिया प्रदर्शन ने उनके लिए हालात मुश्किल कर दिए हैं।
बल्लेबाजी में खतरनाक निर्भरता
आंकड़े टीम इंडिया की सबसे बड़ी कमजोरी उजागर करते हैं। पिछले एक साल में
- विराट कोहली, रोहित शर्मा, शुभमन गिल, श्रेयस अय्यर और केएल राहुल ही 500 से ज्यादा रन बना सके हैं।
- इनके बाद सबसे ज्यादा रन अक्षर पटेल (290) के नाम हैं, जिन्हें लगातार बाहर बैठाया गया।
इसका सीधा मतलब है कि अगर टॉप ऑर्डर फेल होता है, तो पूरी टीम चरमरा जाती है। तीसरे वनडे में यही देखने को मिला, जब विराट कोहली अकेले संघर्ष करते नजर आए।
स्पिन विभाग भी बना चिंता का विषय
पिछले एक साल में तेज गेंदबाजों ने स्पिनरों की तुलना में ज्यादा विकेट झटके हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में भी यही कहानी दोहराई गई।
कुलदीप यादव और रवींद्र जडेजा बल्लेबाजों को बांधने में नाकाम रहे, जिसका फायदा उठाकर न्यूजीलैंड ने रिकॉर्डतोड़ बल्लेबाजी की।
बदलाव अब टाले नहीं जा सकते
घरेलू मैदान पर सीरीज हार, दर्शकों की नाराजगी और कप्तान के बेबाक बयान—ये सभी संकेत दे रहे हैं कि टीम इंडिया अब बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुकी है।
अगली वनडे सीरीज में दर्शकों को एक बदली हुई भारतीय टीम देखने को मिल सकती है, जहां नाम नहीं, बल्कि प्रदर्शन ही चयन की कसौटी होगा।