Tuesday, January 20

मुंबई में बिहार भवन पर सियासी टकराव: राज ठाकरे की मनसे ने किया विरोध, BJP ने किया पलटवार

 

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मुंबई/पटना: मुंबई में 314 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले ‘बिहार भवन’ को लेकर सियासत गरमा गई है। बिहार सरकार ने मुंबई पोर्ट ट्रस्ट से 90 साल की लीज पर ली गई जमीन पर अत्याधुनिक भवन का निर्माण शुरू किया है, जिसका उद्देश्य बिहार से इलाज के लिए आने वाले कैंसर मरीजों को सस्ता और विश्व स्तरीय आवास प्रदान करना है।

 

हालांकि, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के पार्षद यशवंत किल्लेदार ने इस परियोजना का विरोध करते हुए चेतावनी दी कि वे मुंबई में बिहार भवन नहीं बनने देंगे। उनका तर्क है कि बिहार में बुनियादी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं, ऐसे में इतनी बड़ी राशि मुंबई में खर्च करना अनुचित है।

 

भवन की खासियत:

बिहार फाउंडेशन के अनुसार, 70 मीटर ऊंचे इस भवन में 178 कमरे, 240 बेड की डॉरमेट्री, 72 सीटों वाला कॉन्फ्रेंस हॉल, कैफेटेरिया और 233 गाड़ियों की पार्किंग जैसी आधुनिक सुविधाएं होंगी। भवन में निवेश आयुक्त, पर्यटन विभाग और बिहार फाउंडेशन के कार्यालय भी होंगे। यह परियोजना 15 वर्षों के प्रयास और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विशेष योगदान का परिणाम है।

 

राजनीतिक विवाद और BJP का पलटवार:

मनसे के विरोध पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नवनाथ बन ने पलटवार करते हुए इसे ओछी राजनीति करार दिया। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे की प्रांतवाद और विरोध की नीति के कारण हालिया बीएमसी चुनावों में उनकी पार्टी की स्थिति कमजोर हुई। भाजपा ने स्पष्ट किया कि मरीजों की सुविधा के लिए बने इस भवन का विरोध करना गलत है।

 

विश्लेषकों का कहना है कि मनसे की यह सियासत ‘मराठी अस्मिता’ और प्रांतवाद पर आधारित है। पार्टी के गठन से ही उत्तर भारतीयों, विशेषकर बिहार और यूपी के प्रवासियों के खिलाफ मनसे की रुखी नीति रही है। हालिया चुनावों में पार्टी के गिरते वोट प्रतिशत के बाद, मुंबई में बिहार भवन जैसे विवादित मुद्दों के जरिए मनसे अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रही है।

 

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