
नई दिल्ली: मुकेश अंबानी के दो बड़े कंज्यूमर बिजनेस — क्विक कॉमर्स और एफएमसीजी — अब मुनाफा कमाने लगे हैं। रिलायंस इंडस्ट्रीज के अनुसार, इन बिजनेस की बड़ी खरीद क्षमता और मार्जिन बढ़ाने वाली रणनीतियों की वजह से यह संभव हुआ।
क्विक कॉमर्स में बढ़त:
कंपनी के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स ने बताया कि अक्टूबर 2024 में शुरू हुआ क्विक कॉमर्स बिजनेस अब लगभग हर ऑर्डर पर मुनाफा दे रहा है। दिसंबर 2025 को खत्म हुई तिमाही में दैनिक औसत 16 लाख ऑर्डर थे। रिलायंस रिटेल का कहना है कि वे भारत के दूसरे सबसे बड़े क्विक कॉमर्स प्लेयर बनने की राह पर हैं और नेटवर्क और डार्क स्टोर बढ़ाते रहेंगे ताकि हर ऑर्डर की दूरी कम हो सके।
क्विक कॉमर्स बिजनेस में फूड और बेवरेज (F&B) का मार्जिन सबसे ज्यादा है। हर तीन में से एक ऑर्डर F&B का होता है, और इसमें बर्बादी को नियंत्रित करके कंपनी ग्राहकों को बेहतर कीमत पर उत्पाद देती है और मुनाफा भी बनाए रखती है।
कंपनी के 3,000 आउटलेट्स में से लगभग 800 डार्क स्टोर सिर्फ डिलीवरी के लिए हैं। क्विक कॉमर्स में ग्रोसरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और फैशन भी शामिल हैं और ये सभी अच्छे प्रदर्शन में हैं।
एफएमसीजी बिजनेस:
तीन साल पहले शुरू हुआ रिलायंस का एफएमसीजी बिजनेस भी अब EBITDA के लिहाज से मुनाफा देने लगा है। हालांकि, कंपनी ने वित्तीय आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए।
अन्य कंपनियों की स्थिति:
वहीं, क्विक कॉमर्स के अन्य बड़े खिलाड़ी ब्लिंकिट और स्विगी अभी भी कुल मिलाकर मुनाफा नहीं कमा पा रहे हैं। ब्लिंकिट ने पिछले सितंबर तिमाही में नुकसान में कमी दिखाई (156 करोड़ रुपये), जबकि स्विगी ने कंट्रीब्यूशन लॉस में 30% कमी दर्ज की (181 करोड़ रुपये)।
मुनाफे के प्रमुख कारण:
रिलायंस रिटेल के ग्रुप CFO दिनेश तलूजा ने बताया कि कंपनी भारत की सबसे बड़ी ग्रॉसरी खरीद क्षमता का लाभ उठा रही है। साथ ही, उन्होंने स्मार्ट सोर्सिंग और कैटेगरी मिक्स पर ध्यान देकर मुनाफा बढ़ाया है।
रिलायंस के इस कदम से साफ हो गया है कि कुशल प्रबंधन और सही रणनीति से नए बिजनेस भी जल्दी मुनाफे में आ सकते हैं, भले ही प्रतियोगी अभी भी घाटे में हों।