Monday, January 19

IIM की ग्रेजुएट ने छोड़ी सुरक्षित नौकरी, 1 करोड़ का कारोबार खड़ा किया

 

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नई दिल्ली: आईआईएम कलकत्ता की ग्रेजुएट कीर्ति प्रिया ने अपनी अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर एक ऐसा स्टार्टअप शुरू किया है, जो आज 1 करोड़ रुपये का कारोबार कर रहा है। तेलंगाना में 2022 में शुरू हुई उनकी कंपनी ‘कोह फूड्स’ (Koh Foods) 100% प्लांट-बेस्ड सब्जी पाउडर और मिक्स बेचती है। यह स्टार्टअप न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों की पसंद बन रहा है, बल्कि ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण का भी उदाहरण पेश कर रहा है।

 

 

 

छोटे गांव से बड़े सपने तक

 

कीर्ति प्रिया का सफर तेलंगाना के एक छोटे गांव से शुरू हुआ। शिक्षा को महत्व देने वाले परिवार की इस बेटी ने बिट्स पिलानी से बी.फार्मा और आईआईएम कलकत्ता से एमबीए की डिग्री हासिल की। उन्होंने जनलक्ष्मी स्मॉल फाइनेंस बैंक में सीईओ ऑफिस में काम किया और बाद में लोकल नाम के स्टार्टअप को जॉइन किया।

 

व्यस्त जीवनशैली के कारण अक्सर सही पोषण न मिलने से कीर्ति की मां उन्हें घर के बने डिहाइड्रेटेड सब्जी पाउडर भेजती थीं। इन्हें करी या जूस में मिलाकर आसानी से पोषण लिया जा सकता था। यहीं से उन्हें बिजनेस आइडिया आया कि क्यों न यह पारंपरिक नुस्खा लाखों लोगों तक पहुंचाया जाए।

 

 

 

नौकरी छोड़कर चुना उद्यमिता का रास्ता

 

2018 में उन्होंने इस विचार की नींव रखी। शुरुआती सालों में यह केवल परीक्षण के दौर में था। परिवार को चिंता थी, क्योंकि कीर्ति पहली पीढ़ी की उद्यमी थीं।

 

26 साल की उम्र में उन्होंने ग्रामीण तेलंगाना में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित किया। उन्होंने ऐसे किसानों को जोड़ा जो बिना कीटनाशक के खेती करना चाहते थे। स्टैंडअप इंडिया और स्टार्टअप इंडिया के सहयोग से फंड जुटाकर उन्होंने 1 एकड़ में फैक्ट्री लगाई।

 

 

 

ग्रामीण महिलाओं को मिला रोजगार

 

‘कोह फूड्स’ के उत्पाद 100% प्राकृतिक और प्रिजर्वेटिव-फ्री हैं। कीर्ति लगभग 20 किसानों के साथ काम करती हैं। पालक, चुकंदर, गाजर और करी पत्ता जैसी सब्जियों को 60 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान पर इलेक्ट्रिकल डिहाइड्रेशन तकनीक से सुखाया जाता है, ताकि पोषक तत्व बरकरार रहें।

 

फैक्ट्री में 15 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिला। मार्केटिंग के लिए लाइव कुकिंग डिस्प्ले किए जाते हैं, जहां इडली, डोसा जैसे व्यंजन बनाकर दिखाया जाता है कि पाउडर्स का इस्तेमाल कितना आसान है।

 

 

 

बड़ा है आगे का टारगेट

 

वित्त वर्ष 2024 में कंपनी का राजस्व 20 लाख रुपये था, जो अब 1 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। कीर्ति का लक्ष्य केवल भारत तक सीमित नहीं है। उनके उत्पाद अब अमेरिका में भी उपलब्ध हैं। उनका उद्देश्य है कि वैश्विक स्तर पर एक ऐसा ‘क्लीन लेबल’ ब्रांड बनाया जाए, जिस पर लोग भरोसा कर सकें।

 

कीर्ति की कहानी यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प और गुणवत्ता वाले उत्पाद के साथ कोई भी छोटा विचार करोड़ों का बिजनेस बन सकता है।

 

 

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