Monday, January 19

चीन की पॉप मार्ट फैक्ट्री में बाल श्रम और शोषण का खुलासा

 

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नई दिल्ली: इंटरनेट पर लोकप्रिय रोएंदार गुड़िया ‘लबूबस’ अब अपने कारणों से नहीं बल्कि विवादों के कारण सुर्खियों में हैं। न्यूयॉर्क स्थित एनजीओ चाइना लेबर वॉच (CLW) ने खुलासा किया है कि चीनी कंपनी पॉप मार्ट की शुंजिया टॉयज फैक्ट्री में 16-17 साल के किशोरों से कानूनी सुरक्षा के बिना काम कराया जा रहा है।

 

रिपोर्ट के अनुसार, फैक्ट्री में कर्मचारियों से अत्यधिक प्रोडक्शन टारगेट पूरे करवाने के लिए लगातार ओवरटाइम कराया जाता है, जो चीनी श्रम कानूनों का उल्लंघन है। CLW ने 2025 में तीन महीने तक फैक्ट्री में काम करने वाले 50 से अधिक कर्मचारियों से बातचीत की और पाया कि किशोर कर्मचारियों को उनके कॉन्ट्रैक्ट की प्रकृति समझ नहीं आती थी। उन्हें सही जानकारी दिए बिना दस्तावेज़ पर साइन करवाया जाता था।

 

अत्यधिक काम का दबाव

 

कर्मचारियों को हर दिन कम से कम 4,000 लबूबस खिलौने बनाने का टारगेट दिया जाता था।

चीनी कानून के मुताबिक, महीने में ओवरटाइम 36 घंटे तक सीमित है, लेकिन फैक्ट्री में यह 100 घंटे से भी अधिक था।

शुंजिया टॉयज की आधिकारिक सालाना उत्पादन क्षमता 1.2 करोड़ यूनिट है, जबकि वास्तविक उत्पादन 2.4 करोड़ यूनिट से अधिक है।

 

लबूबस की लोकप्रियता और बिक्री

लबूबस खिलौनों ने 2025 के पहले छह महीनों में 4.8 अरब युआन (लगभग 511 मिलियन पाउंड) की बिक्री की। पॉप मार्ट के सीईओ वांग निंग ने कहा कि कंपनी 20 अरब युआन के राजस्व लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।

 

कंपनी की प्रतिक्रिया

पॉप मार्ट के प्रवक्ता ने कहा कि वे कर्मचारियों की भलाई और सुरक्षा को गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि OEM फैक्ट्रियों का नियमित ऑडिट किया जाता है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो स्थानीय कानूनों और नियमों के अनुसार सुधारात्मक कार्रवाई की जाएगी।

 

 

 

निष्कर्ष:

लबूबस गुड़ियों की लोकप्रियता के पीछे फैक्ट्री में चल रहे बाल श्रम और अत्यधिक ओवरटाइम ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनजीओ की रिपोर्ट और कंपनी की जांच से अब यह स्पष्ट होगा कि इस तेजी से बढ़ते खिलौनों के उद्योग में श्रमिकों की भलाई और कानूनी सुरक्षा कितनी सुनिश्चित है।

 

 

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