
नई दिल्ली: आने वाले सप्ताह में सोने की कीमतों में तेजी जारी रहने की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण सुरक्षित निवेश की मांग और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें घटाने की संभावनाएं हैं। वहीं, चांदी ने पिछले हफ्ते जोरदार उछाल देखा है, जिसके बाद अब इसमें कुछ स्थिरता या सीमित दायरे में कारोबार की संभावना जताई जा रही है।
विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक आंकड़े और भू-राजनीतिक घटनाक्रम सोने को सहारा देंगे। अगले हफ्ते प्रमुख आर्थिक डेटा जैसे अमेरिकी महंगाई, लोगों के खर्च का सूचकांक, जीडीपी ग्रोथ और बेरोजगारी के आंकड़े, सोने और चांदी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
सोने की तेजी के पीछे कारण
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का वायदा भाव पिछले हफ्ते 3,698 रुपये यानी 2.7% बढ़कर 1,43,590 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स पर सोने का भाव 4,595.4 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ।
एंजेल वन के उप उपाध्यक्ष (शोध) प्रथमेश माल्या के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर डॉलर, कम बॉन्ड यील्ड और केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार सोने की खरीद सोने को मजबूती दे रही है। माल्या ने उम्मीद जताई कि एमसीएक्स पर सोना 1,46,000 रुपये प्रति 10 ग्राम और वैश्विक बाजार में 4,750 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है।
चांदी में ठहराव का संकेत
चांदी ने पिछले छह दिनों में जोरदार उछाल लगाते हुए 49,100 रुपये की वृद्धि दिखाई। एमसीएक्स पर चांदी का भाव 2,92,960 रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया, जबकि वैश्विक बाजार में यह 88.53 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई।
विश्लेषकों का मानना है कि इतनी लंबी तेजी के बाद चांदी में कुछ हद तक करेक्शन या ठहराव देखना सामान्य है। इनक्रेड मनी के सीईओ विजय कुप्पा ने कहा कि इससे चांदी के दीर्घकालिक रुझान पर कोई असर नहीं पड़ेगा और निवेशक लंबी अवधि के लिए सकारात्मक नजरिए के साथ इसमें बने रह सकते हैं।
निष्कर्ष:
सुरक्षित निवेश की मांग और ब्याज दरों में संभावित कटौती सोने की कीमतों को ऊपर धकेल रही है, जबकि चांदी में पिछले सप्ताह की जोरदार तेजी के बाद फिलहाल थोड़ी स्थिरता देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए सोना अभी भी आकर्षक निवेश विकल्प बना हुआ है, वहीं चांदी में थोड़ी सावधानी बरतना फायदेमंद हो सकता है।