Monday, January 19

JDU में आरसीपी सिंह की नो एंट्री, ललन सिंह ने साफ किया रुख पुराने जख्मों को कुरेदते हुए बताया—क्यों बंद हैं पार्टी के दरवाजे

पटना।
पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की जनता दल (यूनाइटेड) में संभावित वापसी की अटकलों पर अब पूर्ण विराम लग गया है। जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ शब्दों में कहा है कि पार्टी में आरसीपी सिंह के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने आरसीपी सिंह पर पार्टी को राजनीतिक नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाते हुए पुराने विवादों को फिर से उजागर किया।

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आरसीपी की वापसी पर ललन का ब्रेक

बिहार की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से यह चर्चा तेज थी कि कभी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी रहे आरसीपी सिंह जदयू में ‘घर वापसी’ कर सकते हैं। लेकिन इन अटकलों को खारिज करते हुए ललन सिंह ने कहा,
“जिन लोगों के कार्यकाल में पार्टी 70 से ज्यादा सीटों से सिमटकर 40 के आसपास पहुंच गई, उनके लिए अब पार्टी में कोई जगह नहीं है। जनता ने एक बार फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा जताया है।”

ललन सिंह ने बिना नाम लिए आरसीपी सिंह के दौर को जदयू के लिए नुकसानदेह बताया और कहा कि पार्टी अब अपने समर्पित कार्यकर्ताओं और जनता के विश्वास के सहारे आगे बढ़ रही है।

प्रशांत किशोर पर भी तीखा तंज

ललन सिंह ने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पर भी जमकर निशाना साधा। जब उनसे पूछा गया कि अगर प्रशांत किशोर जदयू में वापसी की इच्छा जताएं तो क्या पार्टी उन्हें स्वीकार करेगी, इस पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा,
“वह कौन हैं? क्या वही नहीं जिन्होंने कहा था कि अगर जदयू 25 से ज्यादा सीट जीतेगी तो वे राजनीति छोड़ देंगे? पार्टी ने उससे कहीं अधिक सीटें जीती हैं, फिर भी वे राजनीति में बने हुए हैं।”

गौरतलब है कि प्रशांत किशोर 2020 में निष्कासन से पहले जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे।

तेजस्वी यादव पर भी हमला

ललन सिंह ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपनी हार स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा,
“वे चाहे जितनी बैठकें कर लें, सच्चाई यह है कि वे बुरी तरह पराजित हुए हैं। 243 सदस्यीय विधानसभा में उनकी पार्टी सिर्फ 25 सीटों पर सिमट गई।”

सियासी संदेश साफ

ललन सिंह के इस बयान से यह संदेश साफ हो गया है कि जदयू अब पुराने विवादों को दोहराने या पार्टी से अलग हो चुके नेताओं की वापसी के मूड में नहीं है। पार्टी नेतृत्व पूरी तरह नीतीश कुमार के नेतृत्व में आगे बढ़ने और संगठन को मजबूत करने पर केंद्रित है।

 

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