Saturday, January 17

जावेद अख्तर का 81वां जन्मदिन: दिल टूटे आशिकों के लिए उनकी शायरियां बनेंगी मरहम

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 17 जनवरी 1945 को जन्मे जावेद अख्तर आज यानी 17 जनवरी 2026 को अपने 81वें जन्मदिन पर कदम रख रहे हैं। शब्दों के जादूगर के रूप में जाने जाने वाले जावेद अख्तर ने अपनी शायरी और लेखनी से हर उम्र के पाठकों और श्रोताओं के दिलों को छुआ है।

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प्यार, दर्द, तन्हाई और जीवन की सच्चाइयों को उन्होंने बेहद सरल और असरदार शब्दों में बयां किया। उनके लफ्ज़ कभी खामोशी की आवाज बनते हैं, तो कभी टूटे दिलों के लिए सांत्वना। जब इंसान अपने दर्द को व्यक्त नहीं कर पाता, तब जावेद अख्तर की शायरी उसके मन की भावनाओं को बयां कर देती है।

उनकी कुछ मशहूर पंक्तियां जो दिल को छू जाती हैं:

  • “इन चराग़ों में तेल ही कम था
    क्यूं गिला फिर हमें हवा से रहे”
  • “हम तो बचपन में भी अकेले थे
    सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे”
  • “छोड़ कर जिस को गए थे आप कोई और था,
    अब मैं कोई और हूँ वापस तो आ कर देखिए !”
  • “बहाना ढूँडते रहते हैं कोई रोने का
    हमें ये शौक़ है क्या आस्तीं भिगोने का”
  • “आज फिर दिल ने एक तमन्ना की,
    आज फिर दिल को हमने समझाया….”
  • “दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं
    ज़ख़्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं”
  • “तुमको देखा तो ये ख़याल आया
    ज़िन्दगी धूप तुम घना साया”

जावेद अख्तर की शायरी सिर्फ़ भावनाओं को व्यक्त नहीं करती, बल्कि टूटे दिलों को संभालने और उनके दर्द को समझने की ताकत भी देती है। यही वजह है कि उनके शब्द आंसुओं के बीच मुस्कुराहट भी लौटाने में सक्षम हैं।

जावेद अख्तर का योगदान न केवल हिंदी फिल्मों और गीतों में रहा है, बल्कि उनकी शायरी ने साहित्य प्रेमियों और दिल टूटे आशिकों के लिए हमेशा मरहम का काम किया है।

 

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