
बांग्लादेश चुनाव से पहले बीएनपी अध्यक्ष का ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) अमन आजमी से अचानक मुलाकात, राजनीतिक विशेषज्ञों ने जताई भारत-विरोधी रुख की चिंता
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नई दिल्ली: बांग्लादेश चुनाव से ठीक पहले बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) के नेता तारिक रहमान ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है। चुनाव के लिए अपने देश लौटे रहमान की ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) अमन आजमी से ढाका में हाल ही में हुई मुलाकात राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
अमन आजमी पाकिस्तान समर्थक परिवार से ताल्लुक रखते हैं और बांग्लादेश की राजनीति में अपने भारत-विरोधी एजेंडे के लिए जाने जाते हैं। 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान उनके पिता गुलाम आजम के नेतृत्व में जमात-ए-इस्लामी ने पाकिस्तानी फौज के साथ मिलकर पीस कमेटियों और अल-बद्र जैसी मिलिशिया का गठन किया था, जिनसे हजारों बांग्लादेशियों की हत्या हुई।
तारिक रहमान ने पिछले साल बांग्लादेश लौटते समय भारत के साथ सामान्य और सकारात्मक रिश्तों का संकेत दिया था। लेकिन उनकी अमन आजमी से मुलाकात ने राजनीतिक विशेषज्ञों में चिंता पैदा कर दी है कि यदि बीएनपी सत्ता में आती है, तो पाकिस्तान और आईएसआई के साथ संभावित संबंधों को लेकर संदेह हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जमात-ए-इस्लामी हमेशा से बीएनपी सरकार में अपनी हिस्सेदारी और एजेंडा को बढ़ाने के लिए सक्रिय रहा है। 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद, अमन आजमी की गतिविधियां फिर से बढ़ गईं। बांग्लादेश की राजनीति पर नजर रखने वाले यह भी मानते हैं कि रहमान की नीतियां आईएसआई और पाकिस्तान समर्थक जमात-ए-इस्लामी के प्रभाव से प्रभावित हो सकती हैं।
बीएनपी और भारत के बीच भविष्य के रिश्तों को लेकर यह मुलाकात नए सवाल खड़े कर रही है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि आगामी चुनाव में तारिक रहमान की रणनीति और उसके पाकिस्तान समर्थक संबंधों की गहराई, बांग्लादेश और भारत दोनों के लिए महत्वपूर्ण संकेत होंगे।