
मुंबई: फिल्म इंडस्ट्री के चमकते सितारे ओपी नैय्यर की ज़िंदगी और उनके संगीत की चर्चा आज भी बॉलीवुड में जीवित है। न केवल उनके प्रोफेशनल काम, बल्कि उनकी पर्सनल लाइफ भी हमेशा सुर्खियों में रही। खासतौर पर आशा भोसले के साथ उनका 14 साल का रिश्ता उनके जीवन का सबसे विवादित और चर्चित अध्याय माना जाता है।
ओपी नैय्यर का जन्म 1926 में लाहौर में हुआ। उन्होंने 1952 में फिल्म आसमान से करियर की शुरुआत की, लेकिन असली पहचान उन्हें गुरु दत्त की फिल्मों से मिली। ‘रिदम किंग’ और ‘ताल का बादशाह’ कहे जाने वाले नैय्यर ने आर पार, मिस्टर एंड मिसेज 55, सीआईडी, और तुम सा नहीं देखा जैसी फिल्मों में संगीत दिया।
आशा भोसले के लिए शादीशुदा ओपी नैय्यर हुए पागल
संगीत जगत के जानकार सिराज ख़ान बताते हैं, “यह रिश्ता बॉलीवुड में अपनी तरह का अनोखा था। 1958 से 1972 तक, यानी 14 सालों तक नैय्यर साहब और आशा भोसले का रिश्ता बेहद गहरा था। शादीशुदा शख्स और चार बच्चों के पिता होने के बावजूद नैय्यर साहब ने आशा के लिए सभी बंधनों को दरकिनार कर दिया।” नैय्यर साहब ने खुद भी कहा था, “लव इज़ ब्लाइंड तो सुना था, लेकिन मेरे मामले में लव ब्लाइंड के साथ-साथ डीफ भी था, क्योंकि मैं सिर्फ आशा की आवाज सुनता था।”
राजू भारतन अपनी किताब अ जर्नी डाउन मेमोरी लेन में लिखते हैं कि नैय्यर साहब का प्यार इस हद तक था कि एक बार उन्होंने बिना कोई शब्द कहे गीता दत्त का फोन रख दिया। 1972 में आशा ने इस रिश्ते को खत्म करने का फैसला किया।
अवॉर्ड भी नहीं बर्दाश्त किया
‘प्राण जाए पर वचन न जाए’ फिल्म के लिए रिकॉर्ड किए गए गीत के लिए 1973 में फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। आशा उस इवेंट में नहीं गईं। नैय्यर साहब ने अवॉर्ड ले लिया और घर लौटते समय ट्रॉफी को कार से सड़क पर फेंक दिया। सिराज ख़ान ने बताया, “नैय्यर साहब ने कहा – ‘ये आवाज जो टूटी, उसी के साथ आशा मेरी ज़िंदगी से हमेशा के लिए बाहर है।’”
लता मंगेशकर से नहीं गवाया एक भी गाना
जहां आशा भोसले को नैय्यर साहब पलकों पर रखते थे, वहीं लता मंगेशकर से एक भी गाना नहीं गवाया। उनका मानना था कि उनकी आवाज उनके संगीत के लिए सही नहीं थी।
परिवार ने छोड़ दिया, अंतिम संस्कार में न आए
ओपी नैय्यर की पत्नी सरोज नैय्यर और उनके चार बच्चे – सोनिया, अन्नपूर्णा, लक्ष्मी और आशीष – ने उनके व्यक्तिगत जीवन पर विवादों के बाद दूरी बना ली। 28 जनवरी 2007 को दिल का दौरा पड़ने से उनके निधन के समय परिवार और बॉलीवुड से कोई भी श्मशान घाट पर उपस्थित नहीं था, जैसा कि उन्होंने अंतिम दिनों में इच्छा व्यक्त की थी।
ओपी नैय्यर का जीवन और उनका संगीत आज भी बॉलीवुड के इतिहास में अमिट छाप छोड़ते हैं।