Friday, January 16

बिहार को मिली हरित ऊर्जा की सौगात, बेतिया में शुरू हुआ राज्य का पहला बायोगैस प्लांट

 

This slideshow requires JavaScript.

बिहार ने स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। बेतिया के कुमारबाग में राज्य का पहला बायोगैस प्लांट पूरी तरह तैयार हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान इसे बिहार के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से बने इस प्लांट से न केवल स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होगा, बल्कि किसानों को प्राकृतिक खाद और अतिरिक्त आय का भी लाभ मिलेगा।

 

ऊर्जा उत्पादन के साथ किसानों को दोहरा फायदा

कुमारबाग में स्थापित इस बायोगैस प्लांट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें गोबर, कृषि अपशिष्ट, जैविक कचरा और अन्य जैव-अवशेषों का उपयोग किया जाता है। इनसे तैयार बायोगैस का इस्तेमाल बिजली उत्पादन, रसोई गैस और औद्योगिक जरूरतों के लिए किया जा सकेगा। इससे लकड़ी, कोयला और एलपीजी जैसे पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होगी।

 

बायोगैस उत्पादन के बाद बचने वाली स्लरी किसानों के लिए वरदान साबित होगी। यह स्लरी पूरी तरह प्राकृतिक खाद के रूप में उपयोग की जाएगी, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी और खेती अधिक सुरक्षित व टिकाऊ बनेगी।

 

स्थानीय किसानों और पशुपालकों को सीधा लाभ

इस प्लांट से आसपास के किसानों और पशुपालकों को सीधा आर्थिक फायदा मिल रहा है। वे अपने पशुओं का गोबर और कृषि कचरा प्लांट तक पहुंचाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

 

पर्यावरण संरक्षण में अहम भूमिका

पर्यावरण की दृष्टि से भी यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। खुले में गोबर और जैविक कचरे के सड़ने से होने वाले प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी। स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से कार्बन फुटप्रिंट घटेगा और आसपास के इलाकों में स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा।

 

बिहार के लिए मॉडल परियोजना

विशेषज्ञों का मानना है कि बेतिया का यह बायोगैस प्लांट बिहार के लिए एक मॉडल परियोजना बन सकता है। यदि इसी तरह के प्लांट राज्य के अन्य जिलों में भी स्थापित किए जाएं, तो बिहार ऊर्जा आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगा सकता है।

Leave a Reply