Friday, January 16

आईआरसीटीसी घोटाला: राबड़ी देवी की याचिका पर आज दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई

 

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आईआरसीटीसी घोटाले से जुड़े बहुचर्चित मामले में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत की उम्मीद है। हाईकोर्ट आज उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें राबड़ी देवी ने उनके खिलाफ आरोप तय करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है।

 

यह मामला वर्ष 2017 में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से जुड़ा है। आरोप है कि लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते रांची और पुरी स्थित बीएनआर होटलों के निर्माण और संचालन के ठेकों में कथित अनियमितताएं हुईं। सीबीआई का दावा है कि इन सौदों में ‘कुछ के बदले कुछ’ की नीति अपनाई गई और इसमें लालू परिवार को लाभ पहुंचाया गया।

 

निचली अदालत के आदेश को दी चुनौती

राबड़ी देवी ने दिल्ली हाईकोर्ट में दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका में कहा है कि निचली अदालत ने बिना ठोस सबूतों के उनके खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप तय कर दिए। 13 अक्टूबर 2025 को राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 420 और 120बी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप तय किए थे।

 

‘अनुमानों के आधार पर बनाए गए आरोप’

राबड़ी देवी का कहना है कि जिस समय जमीन और शेयर से जुड़े कथित सौदे हुए, उस समय वे न तो किसी निजी कंपनी की निदेशक थीं और न ही शेयरधारक। उन्होंने न तो टेंडर प्रक्रिया में कोई भूमिका निभाई और न ही रेलवे होटलों से जुड़े किसी निर्णय में शामिल रहीं। उनका तर्क है कि निजी पक्षों के बीच हुए जमीन और शेयर के लेन-देन को गलत तरीके से आपराधिक रंग दिया गया है।

 

सीबीआई के सबूतों पर सवाल

याचिका में यह भी कहा गया है कि सीबीआई जमीन के कम मूल्यांकन या शेयर सौदों में गड़बड़ी का कोई ठोस सबूत या रिपोर्ट पेश करने में विफल रही है। राबड़ी देवी के अनुसार, न तो किसी को धोखा दिए जाने का प्रमाण है और न ही सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने का कोई साक्ष्य।

 

लालू-तेजस्वी भी आरोपी

इस मामले में लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव भी आरोपी हैं। उन्होंने भी आरोप तय करने के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। हालांकि, हाईकोर्ट ने फिलहाल निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार किया है, लेकिन आरोप तय करने की वैधता की शीघ्र जांच का भरोसा दिया है।

 

हाईकोर्ट के फैसले पर टिकी नजरें

निचली अदालत पहले ही गवाहों की गवाही शुरू करने की अनुमति दे चुकी है और मामले में तीखी टिप्पणियां भी की हैं। अब दिल्ली हाईकोर्ट यह तय करेगा कि राबड़ी देवी के खिलाफ आरोप तय करना कानूनी रूप से सही था या नहीं। इस फैसले का असर न केवल इस केस की दिशा पर, बल्कि लालू परिवार से जुड़े अन्य मामलों पर भी पड़ सकता है।

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