
दक्षिण अफ्रीका के एक पिता-पुत्र की जोड़ी ने घर पर ही दुनिया का सबसे तेज बैटरी-पावर्ड ड्रोन बना कर इतिहास रच दिया है। इस होममेड ड्रोन का नाम Peregreen V4 है, जिसने 657 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया।
3D प्रिंटिंग ने बढ़ाई ताकत
ड्रोन को बनाने वाले ल्यूक बेल और माइक बेल ने घर पर पांच महीने की मेहनत के बाद यह उपलब्धि हासिल की। उन्होंने ड्रोन के हर हिस्से को फिर से डिजाइन किया और 3D प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया। इसके तहत कैमरा माउंट, लैंडिंग गियर और मुख्य हिस्सों को एक बार में प्रिंट किया गया, जिससे ड्रोन की उड़ान क्षमता और स्थिरता में जबरदस्त सुधार हुआ।
तीसरी बार तोड़ा वर्ल्ड रिकॉर्ड
ल्यूक-बेल और माइक बेल की यह उपलब्धि तीसरी रिकॉर्ड तोड़ने वाली सफलता है।
- साल 2024 में उन्होंने 480 किमी/घंटा उड़ने वाला ड्रोन बनाया।
- 2025 में 580 किमी/घंटा की रफ्तार वाला ड्रोन बनाया।
- अब Peregreen V4 657 किमी/घंटा की टॉप स्पीड के साथ गिनीज रिकॉर्ड में शामिल है।
पिछले साल ऑस्ट्रेलियाई इंजीनियर बेंजामिन बिग्स का ड्रोन 626 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़कर चर्चा में था, लेकिन अब दक्षिण अफ्रीकी पिता-पुत्र की जोड़ी आगे निकल गई है।
गिनीज ने की पुष्टि
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इस उपलब्धि को कन्फर्म किया है। Peregreen V4 एक बैटरी-पावर्ड रिमोट कंट्रोल ड्रोन है, जिसने सबसे तेज ग्राउंड स्पीड हासिल की। रिकॉर्ड बनाने के लिए ड्रोन ने दो दिशाओं में उड़ान भरी ताकि हवा के प्रभाव का सही आंकलन हो सके। इसके अलावा, विपरीत दिशा में ड्रोन ने 599 किमी/घंटा की रफ्तार भी पाई।
तकनीक और क्रिएटिविटी का संगम
यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि सही तकनीक और इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कितना कारगर साबित हो सकता है। ल्यूक और माइक ने ड्रोन की डिजाइनिंग, तकनीक और टेस्टिंग में हर कदम पर मेहनत की। घर में 3D प्रिंटिंग का इस्तेमाल कर उन्होंने दिखा दिया कि होममेड तकनीक भी विश्व रिकॉर्ड तोड़ सकती है।
NBT की राय:
Peregreen V4 की सफलता यह साबित करती है कि क्रिएटिविटी, तकनीक और मेहनत से सीमाओं को पार किया जा सकता है। यह उपलब्धि न केवल तकनीक प्रेमियों के लिए प्रेरणा है, बल्कि ड्रोन इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक नया मानक भी स्थापित करती है।