
फरवरी 2026 से आपका WhatsApp और अन्य मैसेजिंग ऐप्स चलाने का तरीका बदल सकता है। इसके पीछे सिम-बाइंडिंग नियम का कारण है, जिसे सरकार ने पिछले साल नवंबर में लागू करने का आदेश दिया था।
क्या है सिम–बाइंडिंग?
सिम-बाइंडिंग का मतलब है कि अब आप WhatsApp, Telegram और Signal तभी चला पाएंगे, जब वह सिम कार्ड आपके फोन में लगा होगा, जिस नंबर से ऐप में अकाउंट बनाया गया है। अगर सिम निकाल दी गई या किसी और डिवाइस में डाली गई, तो ऐप काम करना बंद कर देगा।
इसके अलावा, जो मैसेजिंग ऐप्स डेस्कटॉप वर्जन को सपोर्ट करती हैं, उन्हें हर 6 घंटे में सेशन को ऑटोमैटिक लॉग-आउट करना होगा। इसका मतलब है कि कंप्यूटर पर WhatsApp इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को हर 6 घंटे बाद फिर से लिंक करना पड़ेगा।
क्यों आया नया आदेश?
डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) के अनुसार, यह कदम ऑनलाइन फ्रॉड और धोखाधड़ी रोकने के लिए उठाया गया है। पहले WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर सिर्फ एक बार नंबर वेरिफाई करवाने की सुविधा थी, जिससे अपराधी अलग-अलग डिवाइस पर अकाउंट इस्तेमाल कर सकते थे। सिम-बाइंडिंग से ऐसे मामलों में पकड़ आसान होगी।
आप पर क्या असर पड़ेगा?
- अब एक फोन पर अलग-अलग WhatsApp अकाउंट्स चलाना मुश्किल होगा।
- जो लोग अलग-अलग फोन में बिना सिम डालकर WhatsApp चलाते थे, उन्हें परेशानी होगी।
- डेस्कटॉप वर्जन का हर 6 घंटे में लॉग-आउट होना कामकाजी लोगों के लिए चुनौती बन सकता है।
NBT नजरिया:
सिम-बाइंडिंग से ऑनलाइन फ्रॉड कम हो सकता है और प्राइवेसी की सुरक्षा बढ़ेगी। हालांकि, सुविधा के लिहाज से यह कई यूजर्स के लिए असुविधाजनक साबित हो सकता है। सरकार इस नियम को लागू करने से पहले कंपनियों को मोहलत दे सकती है या फैसले में बदलाव कर सकती है।