


जयपुर। राजस्थान में SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस समर्थकों के नाम कटवाने और अधिकारियों पर दबाव डालने का आरोप लगाया था, जिससे राज्य की सियासी हलचल बढ़ गई।
इस पर भजन लाल सरकार में कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा ने गहलोत के आरोपों को खारिज करते हुए कड़ा पटलवार किया। गोदारा ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह भ्रामक और राजनीतिक उद्देश्यपूर्ण हैं। उन्होंने पूर्व सीएम पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्तासीन नेताओं को विवादित मुद्दों के जरिए जनता को गुमराह करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
राजस्थान की राजनीति में यह मामला फोन टैपिंग और मतदाता सूची (SIR) में कथित गड़बड़ी के आरोपों के चलते और जटिल हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के दृष्टिगत यह मुद्दा दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण और संवेदनशील साबित हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषक बता रहे हैं कि SIR प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम कटवाने और जोड़ने के आरोप ने राजनीतिक विरोधाभासों को और उभारा है। दोनों ही दलों के बयानों के बीच जनता और मीडिया में इस विवाद को लेकर गहरी रुचि और बहस जारी है।


