
नई दिल्ली: अगर आप प्रेग्नेंसी की योजना बना रहे हैं, तो ‘बीज संस्कार’ के बारे में जानना आपके लिए उपयोगी हो सकता है। यह प्राचीन भारतीय सिद्धांत न केवल शरीर को, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी गर्भधारण के लिए तैयार करने पर केंद्रित है।
फर्टिलिटी और पेरेंटल कोच, आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉ. गुरप्रीत कौर सान्याल के अनुसार, बीज संस्कार गर्भधारण की तैयारी को शुरुआती स्तर से देखता है। उनका कहना है कि गर्भ ठहरना सिर्फ फर्टिलाइजेशन के समय नहीं होता, बल्कि शरीर और मन की तैयारी हफ्तों और महीनों पहले से शुरू हो जाती है।
बीज संस्कार क्या है?
सरल शब्दों में बीज संस्कार का मतलब है गर्भधारण से पहले प्रजनन से जुड़े ‘बीज’ को तैयार करना। आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार इसमें अंडाणु, शुक्राणु, गर्भाशय और माता-पिता की मानसिक स्थिति शामिल होती है। इसका उद्देश्य है कि कॉन्सेप्शन से पहले शरीर और मन दोनों स्वस्थ हों।
बीज संस्कार तीन मुख्य स्तंभों पर आधारित है:
- रिप्रोडक्टिव सेल्स की गुणवत्ता बेहतर बनाना
- प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना
- गर्भाधान के समय मानसिक और भावनात्मक स्थिति
रिप्रोडक्टिव सेल्स की क्वालिटी
डॉ. गुरप्रीत के अनुसार, अंडाणु लगभग 90 दिनों में पूरी तरह विकसित होते हैं, जबकि शुक्राणु हर 64–72 दिनों में नए बनते हैं। इस दौरान पोषण, शरीर में टॉक्सिन, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और तनाव जैसी चीजें अंडाणु और शुक्राणु की गुणवत्ता, ऊर्जा क्षमता और डीएनए की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।
प्रजनन के लिए बेहतर माहौल
सफल गर्भधारण के लिए हार्मोन बैलेंस, स्वस्थ एंडोमेट्रियम, सही ब्लड फ्लो और स्थिर मेटाबॉलिक मार्कर बेहद जरूरी हैं। यह माहौल इम्प्लांटेशन की सफलता की संभावना बढ़ाता है।
मानसिक और भावनात्मक तैयारी
लंबे समय तक शरीर में तनाव, जैसे कि उच्च कॉर्टिसोल, इंसुलिन या थायरॉइड लेवल, प्रजनन संबंधी संकेतों को प्रभावित कर सकते हैं। आयुर्वेद ने सदियों पहले इसे समझा और आधुनिक विज्ञान भी अब इसे बायोकेमिकल रूप से मान्यता देता है।
बीज संस्कार प्रेग्नेंसी की गारंटी नहीं
डॉ. गुरप्रीत स्पष्ट करती हैं कि बीज संस्कार किसी विशेष बच्चे की गारंटी नहीं देता और न ही यह फर्टिलिटी ट्रीटमेंट का विकल्प है। इसका उद्देश्य केवल शरीर पर पड़ने वाले जैविक प्रभाव को समझना है।
हेल्दी कंसेप्शन के लिए टिप्स
कंसेप्शन से पहले की हेल्थ का सीधा संबंध अंडाणु और शुक्राणु की डीएनए इंटेग्रिटी, सफल इम्प्लांटेशन, शुरुआती गर्भपात के जोखिम और बच्चे की लंबी उम्र की सेहत से होता है। इसे मॉडर्न साइंस ‘एपिजेनेटिक प्रोग्रामिंग’ कहती है।
बीज संस्कार एक निरंतर प्रक्रिया है
बीज संस्कार केवल कुछ दिन का रिवाज नहीं है, बल्कि यह कम से कम 90 दिन की निरंतर तैयारी है:
- एग्स क्वालिटी विंडो: लगभग 3 महीने
- स्पर्म क्वालिटी विंडो: लगभग 3 महीने
- हार्मोनल और मेटाबॉलिक स्थिरीकरण: लगभग 3 महीने
इस दौरान मापने योग्य जैविक बदलाव आना संभव होता है, जिससे प्रेग्नेंसी के लिए बेहतर माहौल तैयार होता है।
निष्कर्ष: बीज संस्कार शरीर, मन और भावनाओं को गर्भधारण के लिए तैयार करता है, लेकिन यह प्रेग्नेंसी की गारंटी नहीं देता। कपल्स को इसे एक हेल्दी प्री-कॉन्सेप्शन केयर प्रक्रिया के रूप में अपनाना चाहिए।