Friday, January 16

बक्सर के हवलदार सुनील सिंह को मरणोपरांत सेना मेडल, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में दिखाई अदम्य बहादुरी

 

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बक्सर/जयपुर: बक्सर के लाल हवलदार सुनील कुमार सिंह को उनकी असाधारण वीरता और अदम्य साहस के लिए मरणोपरांत सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन के पाकिस्तानी ड्रोन पर हमला करते हुए शहीद होने के लिए दिया गया।

 

वीरता की कहानी:

हवलदार सुनील कुमार सिंह 27 मई 2024 से 237 फील्ड वर्कशॉप कंपनी में तैनात थे। 9 मई 2025 की रात उनकी यूनिट पर पाकिस्तानी गोलाबारी शुरू हुई। दो दिशाओं से भारी गोलीबारी के बावजूद हवलदार सुनील अपने पोस्ट पर अडिग रहे।

 

रात करीब 1:10 बजे उन्होंने देखा कि दुश्मन ड्रोन उनके पोस्ट की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने अपने साथियों को अलर्ट किया और बिना भय के खुले मैदान में जाकर राइफल से ड्रोन पर गोलियां चलाईं। इसी दौरान एक तोप का गोला उनके पोस्ट के ऊपर फटा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए।

 

सर्वोच्च बलिदान:

गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद हवलदार सुनील ने अपनी आखिरी सांस तक दुश्मन ड्रोन की गतिविधियों की महत्वपूर्ण जानकारी दी, जिससे भारतीय सेना को खतरे को खत्म करने में मदद मिली और कई सैनिकों की जान बची। उनके साहस और समर्पण ने देश के लिए मिसाल कायम की।

 

सम्मान और भावुक पल:

78वें सेना दिवस समारोह में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने उन्हें मरणोपरांत सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित किया। उनकी पत्नी सुजाता देवी ने सम्मान ग्रहण करते हुए भावुकता जाहिर की।

 

देशभक्ति का परिवार:

शहीद सुनील कुमार सिंह, जनार्दन सिंह के बड़े पुत्र थे। उनके छोटे भाई चंदन कुमार भी सेना में तैनात हैं। बक्सर के समाजसेवी प्रदीप शरण ने कहा कि उनकी शहादत आने वाली पीढ़ियों के लिए देशभक्ति और समर्पण की प्रेरणा बनी रहेगी।

 

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