
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है कि समय की जरूरत अब एक विशेष रॉकेट-मिसाइल फोर्स की है। यह फोर्स भारत को चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के खतरे से निपटने में मदद करेगी। जनरल द्विवेदी ने सुझाव दिया कि भारत इस मामले में ईरान से भी सीख सकता है, क्योंकि ईरान की मिसाइल-रॉकेट क्षमताओं ने अमेरिका और इजरायल को भी हतोत्साहित किया है।
रॉकेट–मिसाइल फोर्स की जरूरत
आज के युद्ध केवल परंपरागत नहीं रहे। मॉडर्न वॉरफेयर और नॉन-कॉन्टैक्ट युद्ध प्रमुख हो गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान के अमेरिकी और चीनी हथियारों को परास्त किया। लेकिन भारत अपने दुश्मनों के बढ़ते खतरे को देखते हुए रॉकेट-मिसाइल फोर्स बनाने की योजना पर काम कर रहा है।
जनरल द्विवेदी ने कहा, “पाकिस्तान और चीन दोनों ने अपनी मिसाइल–रॉकेट यूनिट बना ली है। अब भारत के लिए भी यह आवश्यक है कि लंबी दूरी की मारक क्षमताओं के लिए एक कमांड के भीतर रॉकेट और मिसाइल तैनात हों।”
भारत में मिसाइल और रॉकेट
वर्तमान में भारतीय सेना के पास स्वदेशी और सहयोगी रूप से विकसित मिसाइलों का बड़ा जखीरा है, जिसमें अग्नि, ब्रह्मोस, पृथ्वी और प्रलय जैसी मिसाइलें शामिल हैं। हाल ही में 120 किमी रेंज वाली पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट का परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया। आर्मी चीफ के अनुसार, 300 से 450 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइलों के लिए भी कांट्रैक्ट साइन हो चुका है।
चीन और पाकिस्तान की मिसाइल यूनिट
चीन ने पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) बनाई है, जिसके पास 1,250 से अधिक बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें हैं। पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव के बाद आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड (ARFC) का गठन किया। हालांकि, मिसाइल और रॉकेट भंडार के मामले में पाकिस्तान भारत से काफी पीछे है।
ईरान का मिसाइल मॉडल
ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर एयरोस्पेस फोर्स (IRGCASF) के पास बैलिस्टिक, हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलों का विशाल भंडार है। यह यूनिट लड़ाकू ड्रोन का संचालन भी करती है और सीधे ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई को रिपोर्ट करती है। ईरान की मिसाइल यूनिट अपने हथियारों को अंडरग्राउंड सुरंगों में छिपाकर रखती है, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
अमेरिका–इजरायल भी हतोत्साहित
अमेरिकी अनुमानों के अनुसार ईरान के पास करीब 3,000 बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जो मध्य एशिया में सबसे अधिक हैं। इनके कारण अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ पूर्ण युद्ध शुरू करने से परहेज किया। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपने रॉकेट-मिसाइल फोर्स के लिए ईरान की रणनीति और संचालन से काफी कुछ सीख सकता है।