Thursday, January 15

Makar Sankranti 2026: प्रयागराज और वाराणसी में आस्था का सैलाब, सुबह से लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी

 

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प्रयागराज/वाराणसी: मकर संक्रांति से एक दिन पहले तीर्थराज प्रयागराज और वाराणसी में आस्था, श्रद्धा और उल्लास का समां देखने को मिला। संगम और गंगा घाटों पर देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान किया और परंपराओं के अनुसार दान-दान व अनुष्ठान किए।

 

प्रयागराज में 80 लाख श्रद्धालु

मेला प्रशासन के अनुसार, प्रयागराज में संगम और आसपास के घाटों पर लगभग 80 लाख श्रद्धालुओं ने पुण्य स्नान किया। भोर चार बजे से ही घाटों पर स्नान का सिलसिला शुरू हो गया था। संगम नोज, नैनी के अरैल, झूंसी और अन्य प्रमुख घाट श्रद्धालुओं से पूरी तरह पट गए।

 

देश के अलग-अलग हिस्सों जैसे लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, रीवा, वाराणसी आदि से श्रद्धालु ट्रेन, बस और निजी वाहनों से पहुंचे। लंबी पैदल यात्राओं के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। स्नान के बाद अधिकांश श्रद्धालुओं ने दान किया और अक्षयवट तथा लेटे हनुमान मंदिर में दर्शन किए। जयकारों और मंत्रोच्चार से घाट क्षेत्र भक्तिमय बना रहा।

 

वाराणसी में भी उमड़ी भारी भीड़

बनारस में करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई। स्नान-दान और अनुष्ठान के बाद अन्न का भोग लगाया गया। विश्वनाथ मंदिर में तीन लाख भक्तों ने दर्शन किए। दशाश्वमेध घाट पर खिचड़िया बाबा और मसाननाथ मंदिर में खिचड़ी का भोग वितरित किया गया।

 

घाटों पर सुरक्षा और व्यवस्था

माघ मेले और मकर संक्रांति पर उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें सक्रिय रहीं। घाटों की निगरानी लगातार की जा रही थी और गहराई वाले स्थानों को चिन्हित कर संकेतक लगाए गए।

 

राजघाट से अस्सी घाट तक श्रद्धालुओं का तांता

बुधवार को रात 9:39 पर संक्रांति के मुहूर्त से पहले ही डेढ़ लाख श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर लिया। दशाश्वमेध घाट पर करीब 50 हजार, पंचगंगा घाट पर 40 हजार और अस्सी व तुलसी घाट पर भी 40 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने स्नान किया।

 

दर्शन और पतंगबाजी का उत्सव

सूर्य नमस्कार और जलाभिषेक के बाद श्रद्धालु काल भैरव, काशी विश्वनाथ, संकट मोचन और दुर्गा मंदिर में दर्शन के लिए कतारबद्ध हुए। घाटों की गलियों में दिनभर जाम जैसी स्थिति रही। शहर की छतों और मैदानों में पतंगबाजी का उत्सव भी पूरे जोरों पर रहा।

 

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