
पटना (रमाकांत चंदन) – बिहार की राजनीति में तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज ने फिर से सियासी हलचल पैदा कर दी है। इस आयोजन में पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने अपने बड़े पुत्र तेज प्रताप के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और कार्यकर्ताओं को संदेश भेजा। वहीं तेज प्रताप के मामा ने अपने भाई तेजस्वी यादव के लिए भी सियासी संदेश दे दिया।
राजद परिवार में पिछले आठ महीनों से चल रहे कलह और विवाद के बीच यह आयोजन अहम माना जा रहा है। लालू यादव ने तेज प्रताप को सार्वजनिक मंच पर आशीर्वाद देकर यह दिखाया कि पुत्र के राजनीतिक सफर में उनका सहयोग कायम है, जबकि मां राबड़ी देवी और बहनें मीसा-रोहिणी इस भोज में शामिल नहीं हुईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन केवल पारिवारिक उत्सव नहीं था, बल्कि रणनीतिक रूप से तेज प्रताप को मजबूती देने और पार्टी के भीतर सियासी संदेश पहुंचाने का माध्यम भी था। भोज के दौरान तेज प्रताप ने बड़े पुत्र और बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए परिवार और समर्थकों को एक होने का संदेश दिया।
साथ ही तेज प्रताप के मामा साधु, सुभाष और प्रभुनाथ यादव ने भी तेजस्वी यादव के लिए स्पष्ट संदेश दिया कि अगर राजनीतिक रूप से मजबूत होना है, तो परिवार में एकता जरूरी है। हालांकि तेजस्वी यादव ने व्यक्तिगत कारणों और राजनीतिक विचारों के चलते इस आमंत्रण को स्वीकार नहीं किया।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तेज प्रताप के मकर संक्रांति भोज के पीछे लालू यादव की रणनीति हो सकती है। उन्होंने बेटे को मंच पर बल दिया और साथ ही यह संकेत दिया कि परिवार के भीतर और पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच एकजुटता बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।
राजद का यह परिवारिक–सियासी दृश्य बिहार की राजनीति में कई चर्चाओं को जन्म दे रहा है और आने वाले दिनों में इसके असर भी देखने को मिल सकते हैं।