Wednesday, January 14

सेटल ज़िंदगी छोड़ी, सवालों को झेला और फिर IAS बनकर दिया जवाब—विशाखा यादव की प्रेरक सफलता कहानी

नई दिल्ली।
अक्सर कहा जाता है कि बड़े सपने देखने वालों को कठिन फैसले लेने पड़ते हैं। आईएएस विशाखा यादव की कहानी इसी कथन को साकार करती है। इंजीनियरिंग की डिग्री, मल्टीनेशनल कंपनी में शानदार नौकरी और अच्छी सैलरी—सब कुछ होने के बावजूद विशाखा ने वह रास्ता चुना, जिसमें जोखिम भी था और संघर्ष भी। दो बार असफलता मिलने पर सवाल उठे, लेकिन तीसरे प्रयास में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2019 में ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल कर अपने आलोचकों को खामोश कर दिया।

This slideshow requires JavaScript.

 

दिल्ली पुलिस में हैं पिता, मां बनीं सबसे बड़ा सहारा

दिल्ली के द्वारका की रहने वाली विशाखा यादव के पिता राजकुमार यादव दिल्ली पुलिस में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। विशाखा हमेशा से मानती रही हैं कि उनकी सफलता के पीछे सबसे बड़ा योगदान उनकी मां का है, जिन्होंने हर कठिन दौर में उनका मनोबल बढ़ाया और बिना शर्त समर्थन दिया।

 

DTU से इंजीनियरिंग, सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी

12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली से पूरी करने के बाद विशाखा ने दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (DTU) से इंजीनियरिंग की। वर्ष 2014 में बीटेक करने के बाद उन्हें सिस्को जैसी प्रतिष्ठित टेक कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी मिल गई। बेंगलुरु में करीब दो साल तक उन्होंने जॉब की और एक स्थिर व सुरक्षित जीवन जी रही थीं।

 

अच्छी नौकरी छोड़ चुना यूपीएससी का कठिन रास्ता

हालांकि, विशाखा के मन में कुछ अलग करने की चाह थी। पैसा और सुविधा होने के बावजूद उनका सपना सिविल सेवा में जाकर समाज के लिए काम करने का था। इसी सोच के साथ उन्होंने टेक जॉब छोड़ दी और दिल्ली आकर पूरी तरह UPSC की तैयारी में जुट गईं।

 

दो बार असफलता, लेकिन नहीं टूटा हौसला

पहले प्रयास में असफलता मिली, दूसरे प्रयास में भी सफलता हाथ नहीं लगी। यह वही दौर था जब उनके फैसले पर सवाल उठने लगे। लेकिन विशाखा ने हार मानने के बजाय अपने लक्ष्य पर और मजबूती से ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने ठान लिया था कि जवाब शब्दों से नहीं, कामयाबी से दिया जाएगा

 

तीसरे प्रयास में AIR-6, सपनों को मिली उड़ान

साल 2019 में विशाखा यादव ने इतिहास रच दिया। तीसरे प्रयास में उन्होंने UPSC में ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल कर ली और आईएएस अधिकारी बनीं। यह सफलता सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो असफलता से डरकर अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं।

 

प्रशासनिक सेवा में शानदार योगदान

जून 2025 तक विशाखा यादव अरुणाचल प्रदेश में डिप्टी कमिश्नर के पद पर सेवाएं दे चुकी हैं। हाल ही में उनका तबादला दिल्ली किया गया है। उनकी यात्रा यह साबित करती है कि आत्मविश्वास, धैर्य और निरंतर प्रयास से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

 

प्रेरणा

विशाखा यादव की कहानी उन युवाओं के लिए संदेश है, जो सुरक्षित रास्ता छोड़ने से डरते हैं। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और संकल्प मजबूत, तो असफलताएं भी सफलता की सीढ़ी बन जाती हैं।

 

Leave a Reply