Wednesday, January 14

खंडवा में फ्लोराइड संकट: जवानी में बुढ़ापा, 3000 लोग पी रहे ‘जहर’, टूटने लगे दांत और टेढ़ी हड्डियां

 

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खंडवा: इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश में पेयजल की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हैं। इसी बीच खंडवा जिले के किल्लोद ब्लॉक से एक भयावह तस्वीर सामने आई है। यहाँ के 7 गांवों के करीब 3000 लोग फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं, जिससे डेंटल और स्केलेटल फ्लोरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया है।

 

क्या होती है यह बीमारी

 

छोटे बच्चों के दांत पहले ही पीले पड़कर टूटने लगे हैं, वहीं युवाओं के दांत पूरी तरह सड़ चुके हैं। कई लोगों की हड्डियों में दर्द, टेढ़ापन और चलने-फिरने में दिक्कत जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि उनके सामाजिक और भविष्य का भी गंभीर प्रश्न बन गया है।

 

युवाओं के विवाह पर संकट

 

फ्लोरोसिस का असर युवाओं के जीवन पर सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है। दांतों की बदसूरती के कारण कई लड़कों और लड़कियों के विवाह नहीं हो पा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह बीमारी अब उनके लिए सामाजिक अभिशाप बन चुकी है।

 

एक साल से बनी समस्या

 

ग्रामीणों का आरोप है कि यह समस्या लगभग एक साल से बनी हुई है, लेकिन संबंधित विभागों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। सिर्फ हैंडपंपों को लाल रंग से चिह्नित किया गया, ताकि लोग इसका पानी न पिएं, लेकिन वैकल्पिक शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई।

 

ग्रामीणों की कलेक्टर से गुहार

 

लगातार बिगड़ते हालात और बच्चों के भविष्य की चिंता के चलते ग्रामीण खंडवा कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर ऋषव गुप्ता से मिलकर समस्या और जल्द समाधान की मांग की।

 

प्रशासन ने की कार्रवाई की शुरुआत

 

कलेक्टर ने तत्काल स्वास्थ्य टीम भेजकर पानी में फ्लोराइड की मात्रा जांचने और वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाने की भी योजना बनाई गई है।

 

राजनीति भी गरमाई

 

खंडवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने ग्रामीणों के साथ कलेक्टर से मुलाकात कर न्याय की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय विधायक इस गंभीर मुद्दे पर बात करने से इनकार कर रहे हैं।

 

ग्रामीणों का इंतजार

 

फिलहाल प्रशासनिक आश्वासन तो मिला है, लेकिन स्थायी समाधान का इंतजार अब भी बना हुआ है। सवाल यह है कि क्या किल्लोद ब्लॉक के इन गांवों को जल्द फ्लोराइड मुक्त शुद्ध पानी मिलेगा, या यह समस्या लोगों के जीवन को धीरे-धीरे खोखला करती रहेगी।

 

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