
नई दिल्ली: भारतीय मसालों की दुनियाभर में बादशाहत अब चुनौती के दौर में है। चीन ने मसाला बाजार में भारत की प्रमुख स्थिति को चुनौती देना शुरू कर दिया है। खासकर मिर्च और जीरे जैसे मसालों में चीन ने न केवल उत्पादन शुरू किया है, बल्कि इन्हें सस्ते दामों पर खरीदकर तीसरे देशों को भी निर्यात कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति जारी रही तो दुनिया के सबसे बड़े मसाला निर्यातक के रूप में भारत की स्थिति पर असर पड़ सकता है। बिग हाट के वाइस प्रेसिडेंट संदीप वोडेपल्ली के अनुसार, पिछले दो साल से चीन जीरे और मिर्च की खेती कर रहा है और कुछ बाजारों में भारत की जगह ले रहा है।
मिर्च को भारत के मसाला निर्यात की रीढ़ माना जाता है। वॉल्यूम और मूल्य के लिहाज से यह कुल मसाला निर्यात का एक चौथाई से ज्यादा हिस्सा है। 2024-25 में भारत से मिर्च पाउडर का निर्यात पिछले साल की तुलना में 35% बढ़कर 80.6 मिलियन किलो हो गया। कुल मिर्च निर्यात 19% बढ़कर 7 लाख टन से अधिक हुआ, लेकिन निर्यात से होने वाली कमाई 11% कम रही, जिससे कीमतों पर दबाव साफ दिख रहा है।
जीरे के निर्यात में भी अच्छी बढ़ोतरी हुई है। 2024-25 में जीरे का निर्यात पिछले साल के 1.65 लाख टन से बढ़कर 2.29 लाख टन हो गया, यानी 39% की वृद्धि।
कारोबारियों का कहना है कि चीन विशेष रूप से पैपरिका और तेजा मिर्च पर ध्यान दे रहा है। पैपरिका का इस्तेमाल रंग और हल्के फ्लेवर के लिए होता है, जबकि तेजा मिर्च काफी तीखी होती है और इसका उपयोग दर्द निवारक मलहम जैसी दवाओं में किया जाता है।
किसानों को भी इसका असर दिखने लगा है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे मुख्य उत्पादक राज्यों में मिर्च की खेती का रकबा पिछले साल की तुलना में लगभग 35% कम हो गया है। वहीं, जीरे की खेती का रकबा 7-8% घटा है। बल्क एक्सपोर्टर प्रकाश अग्रवाल का कहना है कि यह बदलाव अगले दो सीज़न में और स्पष्ट दिखने लगेगा।
इस बीच, उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को अपनी निर्यात नीतियों और उत्पादन रणनीति में तेजी लानी होगी, नहीं तो मसाला बाजार में उसकी बादशाहत पर चीन की चुनौती और बढ़ सकती है।