
कानपुर के बिल्हौर कस्बे में मवेशियों के अवशेष मिलने का मामला अब नया मोड़ ले गया है। सोमवार को हिंदूवादी संगठनों के विरोध के बाद पुलिस ने नगर पालिका अध्यक्ष, पूर्व अध्यक्ष समेत 10 नामजद और 25 अज्ञात लोगों के खिलाफ गोहत्या निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया और दो लोगों को गिरफ्तार भी किया। लेकिन मंगलवार को आरोपी पक्ष ने पुलिस के सामने मृत पशुओं के निस्तारण का वैध लाइसेंस पेश किया, जिससे मामला और जटिल हो गया।
पुलिस ने सख्ती दिखाई, चार कर्मी सस्पेंड
पुलिस आयुक्त के निर्देश पर बिल्हौर कोतवाली के थाना प्रभारी अशोक कुमार सरोज समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। उपनिरीक्षक सुधाकर पांडेय की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। मंगलवार दोपहर आरोपियों की गिरफ्तारी और जेल भेजने की तैयारी चल रही थी, लेकिन लाइसेंस पेश होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई धीमी कर दी।
मामला और क्यों बन गया विवादित
सोमवार देर शाम बिल्हौर के शाकिर के खेत में, कब्रिस्तान की चहारदीवारी से सटे टिनशेड में कई मवेशियों के अवशेष पाए गए। किसी ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके बाद विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। मौके पर पुलिस ने लोगों को समझाकर शांत कराया, लेकिन विवाद बढ़ते ही बिल्हौर के विधायक राहुल बच्चा सोनकर ने 48 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार करने और कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
लाइसेंस ने खोली पोल, पुलिस को यूटर्न लेना पड़ा
आरोपी पक्ष ने पुलिस को बताया कि जिला पंचायत कानपुर नगर से उन्हें मृत पशुओं के शव के निस्तारण का वैध लाइसेंस मिला हुआ है। इस ठेके के तहत वे पूरे बिल्हौर कस्बे में शव का निस्तारण और भंडारण कर सकते हैं। लाइसेंस की फीस 20,900 रुपये जमा की गई थी और यह 31 मार्च तक वैध है। यह लाइसेंस मो. अरशद के नाम पर है।
पुलिस आयुक्त का कहना है कि आरोपी पक्ष ने सोमवार को यह दस्तावेज पेश नहीं किया था, इसलिए कार्रवाई हुई। अब मुकदमे की जांच जारी है और जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
यह मामला प्रशासन और स्थानीय कानून के बीच टकराव की झलक प्रस्तुत करता है, साथ ही यह दिखाता है कि मीडिया और सोशल मीडिया की रिपोर्टिंग पर भी तत्काल प्रतिक्रिया क्यों दी जाती है।
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