
ग्रेटर नोएडा। कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चों के लिए इलाज और स्क्रीनिंग की सुविधा शुरू की गई है। इससे न सिर्फ बच्चों का इलाज सस्ता होगा, बल्कि जरूरतमंद बच्चों का नि:शुल्क उपचार भी किया जाएगा।
जिम्स में विशेष थेरेपी रूम
संस्थान के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि शिशु के 12 महीने तक ऑटिज्म के लक्षण दिख सकते हैं। जिम्स में ऑटिज्म पीड़ितों के लिए स्पीच थेरेपी, मेंटल हेल्थ थेरेपी और अन्य जरुरी थेरेपी उपलब्ध होंगी। इसके लिए विशेष थेरेपी रूम तैयार किया गया है।
जागरूकता और स्क्रीनिंग अभियान
संस्थान के डीन अकादमिक डॉ. रंभा पाठक ने बताया कि ICMR के सहयोग से चार जिलों – गौतमबुद्ध नगर, हापुड़, गाजियाबाद और मेरठ – में तीन साल के अभियान में 44 ऑटिज्म प्रभावित बच्चे पाए गए। इनमें कई हाई-रिस्क के भी थे।
ऑटिज्म क्या है?
ऑटिज्म मस्तिष्क को प्रभावित करने वाला रोग है। इससे पीड़ित बच्चों के व्यवहार में बदलाव, देर से बोलना, एक ही शब्द बार-बार दोहराना, अकेले रहना और दूसरों से संवाद में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। समय पर इलाज न होने पर मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है।
पैरेंट्स के लिए सलाह
डॉ. गुप्ता ने माता-पिता से अपील की कि वे अपने बच्चों में ऑटिज्म के पैटर्न पर ध्यान दें और समय रहते उपचार शुरू कराएं। जिम्स में बच्चों की स्क्रीनिंग के साथ-साथ जरूरी थेरेपी उपलब्ध है।