
मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का कपसाढ़ गांव हत्या और अपहरण के सनसनीखेज मामलों के बाद पूरी तरह से पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। गांव में बाहरी लोगों की एंट्री पर कड़ी रोक है और मीडिया को भी प्रवेश की अनुमति नहीं है।
पुलिस–प्रशासन ने गांव को हाई-रिस्क क्षेत्र घोषित किया
गांव की सीमाओं से लेकर पगडंडियों तक पुलिस की कड़ी तैनाती है। जगह-जगह बेरिकेटिंग, CCTV कैमरे और 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सुरक्षा व्यवस्था किसी हाई-रिस्क ऑपरेशन से कम नहीं है।
आरोपी जेल, अपहृत युवती सुरक्षित घर पहुंचाई गई
पुलिस ने आरोपी पारस को जेल भेजा है। वहीं अपहृत युवती रूबी को सुरक्षा घेरे में परिजनों के सुपुर्द कर उसके घर सुरक्षित पहुंचाया गया। ग्रामीण घरों से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस की कड़ी निगरानी के चलते कोई आगे नहीं बढ़ सका।
आधार कार्ड दिखाने के बाद ही एंट्री
गांव में प्रवेश के लिए केवल स्थानीय निवासी ही अनुमति प्राप्त हैं। वैकल्पिक रास्तों से भी कपसाढ़ पहुंचने की कोशिश असफल रही। ग्रामीणों और डॉक्टरों ने बताया कि एंट्री पॉइंट्स, घरों और प्रमुख स्थानों पर CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इनका नियंत्रण एक विशेष कंट्रोल रूम से 24 घंटे किया जा रहा है।
प्रशासन की चुप्पी, गांव संवेदनशील बना हुआ
कपसाढ़ को लेकर आसपास के गांवों में चर्चा है कि इतनी कड़ी सुरक्षा शांति बनाए रखने के लिए जरूरी है। हालांकि, प्रशासन की खामोशी सवाल भी खड़े करती है। लोगों का कहना है कि गांव एक बंद दरवाजे जैसा है, सब कुछ नजरों के सामने होते हुए भी बाहर वालों के लिए हर जानकारी पर ताला है।
वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौके पर
गांव की सीमाओं पर सतत पुलिस गश्त जारी है और वरिष्ठ अधिकारी ही डेरा डाले हुए हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरी सतर्कता बरती जा रही है।