
नई दिल्ली: एआईएमआईएम चीफ और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आजादी के आंदोलन में आरएसएस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार अंग्रेजों के खिलाफ नहीं बल्कि खिलाफत आंदोलन के समर्थन में जेल गए थे। उनका यह बयान महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में निगम चुनावों से पहले एक रैली में आया।
ओवैसी ने कहा कि आरएसएस यह दावा करता है कि हेडगेवार जेल गए थे, लेकिन वे मुसलमानों के खिलाफत आंदोलन के समर्थन में ही जेल गए थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आज आरएसएस मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाता है और देशभक्ति की बातें करता है, लेकिन ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़ते हुए किसी ने अपने प्राण की आहुति नहीं दी।
ओवैसी ने रैली में सवाल किया, “क्या आरएसएस का कोई नेता ऐसा था, जो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते हुए जेल गया?” उन्होंने मुंबई के समाजवादी नेता यूसुफ मेहरअली का उदाहरण भी दिया, जिन्होंने ‘भारत छोड़ो’ और ‘साइमन गो बैक’ जैसे नारे गढ़े। ओवैसी का कहना था कि आरएसएस को इतिहास की सही जानकारी नहीं है और यह दूसरों को गलत तरीके से बांग्लादेशी बताता है।
खिलाफत आंदोलन क्या था?
खिलाफत आंदोलन (1919-1924) पूरी तरह से मुसलमानों का धार्मिक आंदोलन था। इसका उद्देश्य प्रथम विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालकर खलीफा की सत्ता बनाए रखना था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जब असहयोग आंदोलन शुरू हुआ, तो इसके समर्थन में खिलाफत आंदोलन को भी शामिल कर लिया गया। हालांकि इसके समर्थन में उठाए गए कदमों की आगे चलकर आलोचना भी हुई।
ओवैसी का बयान फिर से आरएसएस की आजादी की लड़ाई में भूमिका पर बहस को तेज कर सकता है।