
चेन्नै: मार्च-अप्रैल में तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। तमिलनाडु का चुनाव इस बार पिछले चुनावों से अलग होने वाला है। पहले केवल DMK और AIADMK के बीच मुकाबला होता था, लेकिन 2026 में अभिनेता विजय अपनी पार्टी तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) के साथ चुनाव मैदान में उतर चुके हैं। इस कदम ने चुनावी समीकरण को त्रिकोणीय बना दिया है।
विजय के करिश्माई प्रभाव से बदलेंगे समीकरण
234 सदस्यों वाली तमिलनाडु विधानसभा में पहली बार तीसरी ताकत TVK पुराने समीकरण बदल सकती है। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि विजय 15 प्रतिशत वोट हासिल कर सकते हैं, जो DMK या AIADMK के लिए अकेले दम पर पूर्ण बहुमत हासिल करना मुश्किल बना देगा।
पिछले चुनाव का पैटर्न
पिछले विधानसभा चुनाव में DMK को 37.70 प्रतिशत और AIADMK को 33.29 प्रतिशत वोट मिले थे। विजय की स्टारडम और फैन-फॉलोइंग युवाओं और महिलाओं में काफी मजबूत है। ईसाई और मुस्लिम वोटरों में भी उनका समर्थन देखा जा रहा है।
DMK को संभावित नुकसान
विजय के उदय से DMK को नुकसान हो सकता है, क्योंकि राज्य के 12 प्रतिशत ईसाई-मुस्लिम वोटर पारंपरिक रूप से DMK को समर्थन देते रहे हैं। विजय अपने भाषणों में स्टालिन पर सीधे बीजेपी से सांठगांठ का आरोप लगाते हैं, जिससे उनकी राजनीतिक पहचान और भी मजबूत हो रही है।
स्टालिन की अग्निपरीक्षा
DMK नेता स्टालिन के लिए 2026 का चुनाव असली परीक्षा होगा। स्टालिन अपने गठबंधन—लेफ्ट, VCK, MDMK और IUML के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे। करुणानिधि के निधन के बाद स्टालिन DMK के प्रमुख बने और 2021 में सत्ता हासिल की।
AIADMK की रणनीति
AIADMK ने भी चुनावी रणनीति बदली है। गठबंधन में बीजेपी की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, और पूर्व मुख्यमंत्री ए. पलानीसामी अपने OBC-दलित वोटरों को साधने के साथ DMK विरोधी ताकतों को जोड़ने में लगे हैं।
विशेषज्ञों की राय:
त्रिकोणीय मुकाबला होने पर नतीजे उलट-पुलट वाले हो सकते हैं। यह चुनाव DMK और AIADMK के लिए कठिन चुनौती होगा, जबकि विजय की TVK पूरी तरह चुनावी खेल में नया मोड़ ला सकती है।