Monday, January 12

लखनऊ KGMU तोड़फोड़ मामला: FIR न होने पर डॉक्टरों का अल्टीमेटम, OPD बंद करने का ऐलान

लखनऊ।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में महिला अधिकारियों के साथ अभद्रता और परिसर में तोड़फोड़ की घटना को लेकर विश्वविद्यालय में आक्रोश लगातार गहराता जा रहा है। घटना के 72 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद एफआईआर दर्ज होने से शिक्षकों, रेजीडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।

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इस मुद्दे पर सोमवार को KGMU की संयुक्त समिति ने पुलिस प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि तय समयसीमा में एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो 13 जनवरी 2026 से आकस्मिक सेवाओं को छोड़कर सभी OPD सेवाएं बंद कर दी जाएंगी।

9 जनवरी को हुई थी तोड़फोड़ की घटना

संयुक्त समिति के अनुसार, 9 जनवरी को अपर्णा यादव के समर्थकों ने लगभग 100 से 150 लोगों के साथ KGMU परिसर में घुसकर अराजकता फैलाई। आरोप है कि इस दौरान कुलपति, प्रति-कुलपति, विशाखा समिति की अध्यक्ष और प्रॉक्टोरियल बोर्ड की महिला सदस्यों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और विश्वविद्यालय परिसर में तोड़फोड़ की गई।

घटना के दिन ही KGMU प्रशासन की ओर से प्रॉक्टर के माध्यम से चौक थाने में लिखित तहरीर दी गई थी, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।

गंभीर आरोप, सुरक्षा पर सवाल

डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि एफआईआर दर्ज न होना न्याय में देरी का स्पष्ट उदाहरण है और इससे विश्वविद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। संयुक्त समिति ने आरोप लगाया कि अपर्णा यादव की कार्यप्रणाली उनके पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है, जिससे सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचा है।

समिति का यह भी कहना है कि बिना ठोस तथ्यों के प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विश्वविद्यालय प्रशासन को बदनाम करने का प्रयास किया गया।

देश का प्रमुख चिकित्सा संस्थान

KGMU देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में शुमार है, जहां दूर-दराज से गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीज आते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम डॉक्टरों, रेजीडेंट्स, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है।

मंगलवार को तय होगी आगे की रणनीति

संयुक्त समिति ने बताया कि मरीजों की परेशानी को देखते हुए मानवीय आधार पर 24 घंटे की मोहलत दी गई है। आगे की रणनीति तय करने के लिए 13 जनवरी (मंगलवार) को दोपहर 2 बजे शिक्षकों, रेजीडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों की संयुक्त बैठक बुलाई गई है।

यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो इस आंदोलन का असर हजारों मरीजों की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।

 

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