Friday, May 15

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‘हिंदू कभी लड़ना नहीं चाहता, पर आत्मरक्षा उसका अधिकार है’: देवकीनंदन ठाकुर का सनातन पर हमलों पर कड़ा रुख

 

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कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने मथुरा में मीडिया से बातचीत के दौरान सनातन धर्म और हिंदुत्व को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी पर अपना ठोस रुख पेश किया। उन्होंने कहा कि हिंदू मूल रूप से अहिंसावादी है, लेकिन जब बात धर्म, परिवार और अस्तित्व की सुरक्षा की आती है, तो शस्त्र उठाना अंतिम और अनिवार्य विकल्प बन जाता है।

 

देवकीनंदन ठाकुर ने रामायण और महाभारत का उदाहरण देते हुए बताया कि युद्ध हमेशा अंतिम विकल्प रहा है। उन्होंने कहा, “भगवान कृष्ण ने शांति के लिए पांच गांव तक मांग लिए, लेकिन जब अन्याय की सीमा पार हो गई, तब महाभारत जैसा महायुद्ध हुआ। हिंदू कभी किसी की जमीन छीनने नहीं गया, लेकिन अगर कोई हिंदू की गाय, मां या बहन-बेटी की इज्जत पर हाथ डालेगा, तो चुप रहना संभव नहीं है।”

 

कथावाचक ने कहा कि सनातन धर्म का मूल संदेश ‘जियो और जीने दो’ है, लेकिन यदि किसी ने जीने ही न दिया, तो ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ ही अंतिम मार्ग बचता है। उन्होंने चेतावनी भरे स्वर में कहा कि अब सनातनी अपनी सुरक्षा के प्रति सजग हो रहे हैं।

 

देवकीनंदन ठाकुर ने समाज को जागृत होने का आह्वान करते हुए कहा, “हमारी संस्कृति शांति की है, लेकिन न्याय और धर्म की रक्षा के लिए हमें भी खड़ा होना होगा। हिंदुत्व पर हमला केवल हिंदू समाज पर नहीं, बल्कि पूरी मानवता पर हमला है।”

 

उन्होंने अंत में जोर देकर कहा कि सनातन धर्म ने हमेशा सहिष्णुता और मर्यादा का पालन किया है, लेकिन अत्यधिक सहनशीलता के कारण हमने अपने अस्तित्व का नुकसान भी झेला है। अब समय आ गया है कि सनातनी अपनी संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए सजग रहें।

 

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