
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा अनुशासित रहे और अपनी जिम्मेदारियों को समझे। इसके लिए कभी-कभी सख्ती बरतना ज़रूरी होता है। लेकिन कई बार माता-पिता अनुशासन सिखाने के लिए ऐसे तरीके अपनाते हैं, जो बच्चे के दिल और दिमाग पर नकारात्मक असर डालते हैं। ये तरीके बच्चे को सीखने में मदद नहीं करते, बल्कि उनकी मन में डर और दूरी पैदा कर सकते हैं।
आइए जानते हैं वे 4 तरीके जिन्हें अपनाने से बचना चाहिए:
- बच्चे पर चिल्लाना, डांटना
गलत व्यवहार पर बच्चे को चीख-चिल्लाकर या डांटकर सुधारने की कोशिश करना सबसे बड़ा नुकसान करता है। इससे बच्चा डरने लगता है और छोटी-छोटी बातों पर सवाल पूछना या अपनी समस्या बताना बंद कर देता है। कुछ बच्चे इसे दिल से लगा लेते हैं और भविष्य में माता-पिता से दूरी बना लेते हैं। - बच्चों पर पाबंदियां लगाना
मनपसंद चीजें जैसे- खिलौने, टीवी टाइम, बाहर खेलने या ट्रीट्स से वंचित करना, अनुशासन सिखाने का गलत तरीका है। इससे बच्चे का ध्यान गलतियों पर नहीं, बल्कि उनसे छीन ली गई चीज़ों पर रहता है। यह नाराजगी, गुस्सा और बगावती रवैये को जन्म दे सकता है। - मार–पीट कर अनुशासन सिखाना
कुछ माता-पिता बच्चों की गलतियों को सुधारने के लिए थप्पड़ या मार देते हैं। हालांकि यह पल भर में असर दिखा सकता है, लेकिन लंबे समय में यह बच्चों में आक्रामकता, चिंता और गहरी नाराजगी पैदा कर सकता है। - इमोशनल पनिशमेंट देना
इसमें माता-पिता बच्चे से दूरी बना लेते हैं या उससे बात करना बंद कर देते हैं। यह तरीका फिजिकल पनिशमेंट से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है। बच्चे को लगता है कि माता-पिता का प्यार कम हो गया है, जिससे आत्मविश्वास कमजोर होता है और वह खुद को दोषी मानने लगता है।
सही तरीका:
बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए हमेशा सजा जरूरी नहीं है। सही मार्गदर्शन, धैर्य और कभी-कभी बच्चों को अपनी गलतियों से सीखने का मौका देना ज्यादा प्रभावी होता है। बच्चे तब बेहतर सीखते हैं जब वे अपनी गलती के नतीजों को समझते हैं, न कि डर के कारण कोई काम करते हैं। माता-पिता का प्यार, समझ और भावनात्मक सुरक्षा बच्चों के विकास के लिए बेहद जरूरी है।