
नई दिल्ली।
तमिल सुपरस्टार थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ की रिलीज को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मद्रास हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के अंतरिम आदेश के खिलाफ अब फिल्म के निर्माताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सोमवार को इस मामले में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की गई।
फिल्म के प्रोड्यूसर KVN प्रोडक्शंस LLP ने हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें सिंगल बेंच द्वारा सेंसर सर्टिफिकेट जारी करने के निर्देश पर रोक लगा दी गई थी। मेकर्स ने सुप्रीम कोर्ट से सेंसर बोर्ड को फिल्म के लिए प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश देने की मांग की है।
सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने से टली रिलीज
‘जन नायकन’ को 9 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज होना था, लेकिन सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) से सर्टिफिकेट नहीं मिलने के कारण रिलीज टालनी पड़ी। इसके बाद मामला मद्रास हाई कोर्ट पहुंचा।
हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने पहले CBFC को फिल्म को UA 16+ सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया था, लेकिन उसी दिन डिवीजन बेंच ने उस आदेश पर रोक लगा दी।
CBFC चेयरपर्सन का फैसला बना विवाद की जड़
विवाद उस समय बढ़ा, जब CBFC की एग्जामिनिंग कमेटी द्वारा सुझाए गए कट्स के बाद फिल्म को सर्टिफिकेशन के लिए तैयार माना गया था। इसके बावजूद 6 जनवरी को CBFC चेयरपर्सन ने नियम 24 का हवाला देते हुए फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया।
CBFC की ओर से दावा किया गया कि फिल्म के कंटेंट को लेकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सशस्त्र बलों के चित्रण से जुड़ी एक शिकायत मिली थी। यह शिकायत एग्जामिनिंग कमेटी के ही एक सदस्य द्वारा की गई, जिसने पहले फिल्म को क्लियर किया था।
सिंगल बेंच ने सेंसर बोर्ड को लगाई फटकार
हाई कोर्ट की सिंगल बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस पीटी आशा कर रही थीं, ने CBFC के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि एग्जामिनिंग कमेटी की सिफारिश के बाद चेयरपर्सन का फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी को भेजना नियमों के खिलाफ है।
अदालत ने यह भी कहा कि एक ही सदस्य द्वारा पहले फिल्म को मंजूरी देना और फिर उसके खिलाफ शिकायत करना खतरनाक परंपरा को जन्म देगा, जिससे CBFC की प्रक्रिया पर भरोसा कमजोर होगा।
डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर लगाई रोक
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा कि CBFC को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका नहीं दिया गया।
डिवीजन बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि मेकर्स ने 9 जनवरी की रिलीज का हवाला देकर अदालत पर जल्दबाजी में फैसला देने का दबाव बनाया। कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि CBFC से मंजूरी मिलने से पहले फिल्म की रिलीज डेट घोषित क्यों की गई।
अब सुप्रीम कोर्ट में होगा फैसला
डिवीजन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की थी, लेकिन उससे पहले ही मेकर्स ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया है। अब सबकी नजरें शीर्ष अदालत पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि ‘जन नायकन’ को जल्द रिलीज की अनुमति मिलेगी या नहीं।
गौरतलब है
‘जन नायकन’ को थलपति विजय की आखिरी फिल्म माना जा रहा है। इसके बाद वह अपनी पार्टी TVK के जरिए पूरी तरह राजनीति में सक्रिय होने वाले हैं, जिससे फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।