
मुंबई। हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित और आइकॉनिक खलनायकों में शुमार अमरीश पुरी की आज, 12 जनवरी को पुण्यतिथि है। वर्ष 2005 में 72 वर्ष की आयु में उनका निधन हुआ था। अपनी भारी आवाज, प्रभावशाली संवाद अदायगी और दमदार स्क्रीन प्रेजेंस से उन्होंने खलनायक की परिभाषा ही बदल दी। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि उनकी मौत की वजह बनी गंभीर बीमारी की जड़ एक फिल्म की शूटिंग के दौरान हुआ हादसा था।
अमरीश पुरी को मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम नामक एक दुर्लभ ब्लड कैंसर था। इस बीमारी के बारे में उनके बेटे राजीव अमरीश पुरी ने एक इंटरव्यू में चौंकाने वाला खुलासा किया था। राजीव के मुताबिक, वर्ष 2003 में फिल्म ‘जाल: द ट्रैप’ की शूटिंग के दौरान अमरीश पुरी एक गंभीर दुर्घटना का शिकार हो गए थे।
हिमाचल प्रदेश में चल रही शूटिंग के दौरान एक मोटरसाइकिल स्टंट गलत हो गया। इस हादसे में अमरीश पुरी के चेहरे और आंखों में गहरी चोटें आईं और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बार-बार रक्त चढ़ाना पड़ा। राजीव पुरी का कहना है कि इसी दौरान उन्हें संभवतः संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया, जिसने बाद में उनके शरीर में ब्लड डिसऑर्डर को जन्म दिया।
कुछ महीनों बाद अमरीश पुरी की तबीयत लगातार बिगड़ने लगी। कमजोरी, भूख न लगना और थकान जैसे लक्षण सामने आए। चिकित्सकीय जांच के बाद डॉक्टरों ने मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम की पुष्टि की। यह खबर अमरीश पुरी के लिए बेहद आघातकारी थी, लेकिन उन्होंने इस बीमारी को कभी सार्वजनिक नहीं किया।
राजीव पुरी के अनुसार, अमरीश पुरी अत्यंत अनुशासित जीवन जीते थे और नहीं चाहते थे कि उनकी बीमारी के कारण किसी निर्माता या निर्देशक को नुकसान हो। यही वजह थी कि उन्होंने अपनी बिगड़ती सेहत के बावजूद बिना किसी को बताए अपनी सभी फिल्मों की शूटिंग पूरी की।
दिसंबर 2004 में अचानक उनकी तबीयत और खराब हो गई। एक दिन वह घर में लड़खड़ाकर गिर पड़े। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां ब्रेन हैमरेज की पुष्टि हुई। सर्जरी भी की गई, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद 12 जनवरी 2005 की सुबह 7:30 बजे उनका निधन हो गया।
करीब 450 से अधिक फिल्मों में काम करने वाले अमरीश पुरी ने ‘मिस्टर इंडिया’ के मोगैंबो, ‘कोयला’, ‘करण अर्जुन’, ‘नायक’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ जैसे अनगिनत यादगार किरदारों से अमिट छाप छोड़ी। उनके जाने के बाद हिंदी सिनेमा में वैसा खलनायक दोबारा पैदा नहीं हो सका।
आज भी यह कहना गलत नहीं होगा कि अमरीश पुरी हिंदी सिनेमा के अंतिम महान खलनायक थे—ऐसे कलाकार, जिनकी खलनायकी में भी नायक से अधिक नायकत्व था।