
इस्लामाबाद, 12 जनवरी 2026 – ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब तेहरान से पूरे देश में फैल चुके हैं, जिससे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ईरान में बढ़ती अस्थिरता पर दिन-रात नजर रख रही है, क्योंकि उसे लगता है कि अगर स्थिति बिगड़ी तो इसके गंभीर प्रभाव देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय संतुलन पर पड़ सकते हैं।
पाकिस्तान और ईरान का लंबा बॉर्डर लगभग 900 किलोमीटर का है, जिसमें ज्यादातर पहाड़ी और बाड़ेबंदी से असुरक्षित इलाके शामिल हैं। इस वजह से पाकिस्तान को डर है कि ईरान में चल रही अशांति सीमा पार फैल सकती है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, “पाकिस्तान इसे ईरान का अंदरूनी मामला मानता है, लेकिन पूरी सतर्कता से स्थिति पर नजर रख रहा है। हम पड़ोसी देश में अराजकता नहीं चाहते।”
पाकिस्तानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक विरोध प्रदर्शन जारी रहने पर क्षेत्रीय अस्थिरता पूरे पड़ोसी इलाके में फैल सकती है। इसीलिए पाकिस्तान ने ईरान के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। पाकिस्तानी राजदूत मुदस्सिर टीपू ने अपने नागरिकों से कहा, “ईरान यात्रा करने वाले सभी नागरिक सुनिश्चित करें कि उनके पास वैध वीजा और एग्जिट स्टैम्प मौजूद हों।”
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ मुहम्मद हुसैन ने कहा कि पिछले तीन दशकों में ईरान में कई प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन इस बार हथियारबंद प्रदर्शनकारी और हिंसक घटनाएं अस्थिरता की गंभीर चुनौती पेश कर रही हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि ईरान में अस्थिरता पाकिस्तान के लिए सीमा पार व्यापार, तस्करी और बलूचिस्तान में सीमा प्रबंधन के मामलों को जटिल बना सकती है। इसके अलावा, शरणार्थियों का दबाव बढ़ सकता है और अमेरिका, इजरायल और खाड़ी देशों के साथ पाकिस्तान के संबंधों में संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में इस्लामाबाद की कोशिश है कि ईरान में स्थिरता बनी रहे और सीमा पार प्रभावों को नियंत्रित किया जा सके।