
नई दिल्ली/ब्रसेल्स: भारत और यूरोपीय संघ (EU) दुनिया का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) करने के बेहद करीब हैं। इस महीने ब्रसेल्स में भारतीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने EU के कारोबारी मंत्रियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें संभावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने पर बातचीत हुई। फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार यह बातचीत अब अंतिम चरण में है।
यह पहल विशेष रूप से अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और H-1B वीज़ा प्रतिबंधों से प्रभावित भारतीय व्यवसायों और प्रोफेशनल्स के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि EU के दरवाजे पूरी तरह खुलने से अमेरिकी असर को कम किया जा सकेगा, खासकर STEM प्रोफेशन में।
चीन पर निर्भरता घटाने में मदद
भारत और EU दोनों ही चीन पर अपनी निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहे हैं। यूरोप के क्रिटिकल रॉ मटीरियल्स एक्ट (CRMA) ने भारत को कच्चे माल के प्रमुख स्रोतों में गिना है। भारत की सरकारी कंपनी ‘इंडियन रेयर अर्थ्स’ हर साल 1,300–1,500 टन नियोडिमियम ऑक्साइड का उत्पादन करती है। इस ट्रेड डील से EU को चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
भारत को आर्थिक लाभ
FTA लागू होने के बाद भारत को शॉर्ट-टर्म में लगभग 3.5–5.16 अरब डॉलर का फायदा होने का अनुमान है। यूरोपीय कारों के आयात पर 60% से ज्यादा ड्यूटी कम होने से भारत में पूरी तरह असेंबल कारों की कीमतों में गिरावट आएगी। इसके अलावा टेक्सटाइल, गारमेंट्स, ज्वेलरी और रत्न जैसे लेबर इंटेंसिव सेक्टर को भी भारी लाभ मिलेगा। फोर्ब्स के अनुसार, सर्विसेज एक्सपोर्ट में लगभग 20% की बढ़ोतरी की संभावना है।
भारत और EU के बीच पिछले एक दशक में सामानों का व्यापार करीब 90% बढ़ा है। EU भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और 2024 में भारत के कुल व्यापार का 11.5% हिस्सा EU के साथ सामानों के व्यापार से आया।
भारत-EU साझेदारी
फरवरी 2025 में नई दिल्ली में हुई बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत-EU साझेदारी को बेहतर बनाने और तेज करने के लिए महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। दोनों पक्ष साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और भरोसे के आधार पर यह समझौता कर रहे हैं।
इस व्यापार समझौते से भारत को वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में अपनी स्थिति मजबूत करने और अमेरिका पर निर्भरता कम करने का अवसर मिलेगा।