
नई दिल्ली। उत्तर भारत इस समय सर्दी से जूझ रहा है, लेकिन बीयर और कोला निर्माता आगामी गर्मी और होली की तैयारियों में जुट गए हैं। हर साल होली पर न केवल एयरेटेड ड्रिंक की खपत बढ़ती है, बल्कि बीयर और अन्य अल्कोहलिक बेवरेज की मांग भी चरम पर होती है। इस मांग को पूरा करने के लिए भारत में एल्यूमिनियम कैन का आयात बढ़ा दिया गया है।
कैन की कमी और आयात
देश में बेवरेज पैकिंग के लिए एल्यूमिनियम कैन की घरेलू उत्पादन क्षमता सीमित है। इसी वजह से श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से कैन का आयात किया जा रहा है। पिछले साल आयात पर कुछ प्रतिबंधों के कारण देश में कैन की कमी देखी गई थी, और इस साल भी स्थिति बदली नहीं है। होली तक तैयारियों के लिए कंपनियों ने आयात को दोगुना कर दिया है।
क्यों हुई कैन की कमी?
ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) के महानिदेशक विनोद गिरी बताते हैं कि अप्रैल 2025 से क्वालिटी कंट्रोल आर्डर (QCO) लागू होने के बाद एल्यूमिनियम कैन भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) सर्टिफिकेशन के दायरे में आ गया। इसका मतलब है कि अब केवल उन्हीं प्लांट से आयात संभव है जिनका निरीक्षण BIS द्वारा किया गया हो। इसमें सामग्री संरचना, दबाव प्रतिरोध, रिसाव रोकथाम और आंतरिक- बाहरी कोटिंग जैसे मानक शामिल हैं। सर्टिफिकेशन में लगभग एक साल का समय लगता है।
कैन की खपत में बढ़ोतरी
भारत में बेवरेज की बदलती लाइफस्टाइल के चलते कैन की मांग लगातार बढ़ रही है। हर चौथा व्यक्ति सॉफ्ट ड्रिंक या बीयर कैन में खरीदता है, और बीयर के मामले में यह संख्या 85% तक पहुंच गई है। कैन न केवल अधिक सुविधाजनक और आकर्षक हैं, बल्कि रीसाइक्लिंग में भी कुशल माने जाते हैं।
इंडस्ट्री की मांग
बेवरेज कंपनियां चाहती हैं कि आयातित कैन पर पिछले साल जैसी छूट और प्रमाणन में अस्थायी ढील अगले साल भी जारी रहे। फिलहाल भारत में घरेलू निर्माता जैसे बॉल बेवरेज पैकेजिंग इंडिया और कैन-पैक इंडिया अपनी पूरी क्षमता पर काम कर रहे हैं और कम से कम 6-12 महीनों तक अतिरिक्त सप्लाई बढ़ाना मुश्किल है।
निष्कर्ष
गर्मियों और होली की खपत को देखते हुए, एल्यूमिनियम कैन का आयात अत्यंत जरूरी हो गया है। इसके बिना कोला और बीयर निर्माता उपभोक्ताओं की मांग को पूरा नहीं कर पाएंगे। इंडस्ट्री का मानना है कि विदेशी आयात और सर्टिफिकेशन में अस्थायी ढील से होली पर गला तर करने वाले पेय पदार्थ आसानी से उपलब्ध होंगे।