Monday, January 12

स्मार्टफोन सुरक्षा को लेकर सरकार की बड़ी तैयारी, Apple-सैमसंग समेत कंपनियों से मांगा जाएगा सोर्स कोड

नई दिल्ली: देश में स्मार्टफोन सुरक्षा को लेकर सरकार ने बड़े कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार स्मार्टफोन कंपनियों से बातचीत कर रही है और उन्हें नए सुरक्षा नियमों के तहत कई बदलाव करने के लिए तैयार कर रही है।

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सरकार चाहती है कि कंपनियां अपने फोन में मैलवेयर स्कैनिंग का ऑप्शन दें, अनचाही ब्लोटवेयर ऐप्स को अनइंस्टॉल करने की सुविधा दें और बड़े सॉफ़्टवेयर अपडेट से पहले सरकार को जानकारी दें। हालांकि, Apple, Samsung, Google और Xiaomi जैसी बड़ी कंपनियां इस प्रस्ताव का विरोध कर रही हैं।

सरकार का मकसद:
सरकार के अनुसार यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के विज़न का हिस्सा है। प्रस्तावित नियमों में कुल 83 नए सुरक्षा मानक शामिल हैं, जिनका उद्देश्य यूजर्स के डेटा की प्राइवेसी को बढ़ाना है। इसके तहत:

  • बड़े सॉफ़्टवेयर अपडेट की जानकारी पहले से दी जाएगी।
  • फोन में पहले से इंस्टॉल ऐप्स को डिलीट करने की सुविधा होगी।
  • बैकग्राउंड में कैमरा और माइक्रोफोन के इस्तेमाल को ब्लॉक करने जैसे सुरक्षा उपाय होंगे।

सरकार का दावा है कि इससे यूजर्स मैलवेयर और जासूसी के खतरों से सुरक्षित रहेंगे। देश में वर्तमान में लगभग 75 करोड़ स्मार्टफोन इस्तेमाल हो रहे हैं, इसलिए इसे बेहद जरूरी माना जा रहा है।

कंपनियों की आपत्ति:
स्मार्टफोन कंपनियों को सरकार द्वारा सोर्स कोड तक पहुंच देने की शर्त अस्वीकार्य लग रही है। सोर्स कोड फोन का सबसे संवेदनशील हिस्सा होता है। इंडियन मोबाइल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (MAIT) का कहना है कि इससे कंपनियों की तकनीक और यूजर की प्राइवेसी दोनों को खतरा हो सकता है। Apple और अन्य कंपनियां पहले भी इस तरह की मांगों को खारिज कर चुकी हैं।

यूजर्स पर असर:
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रस्ताव से यूजर्स को कुछ फायदे मिल सकते हैं। उदाहरण के लिए, फोन में पहले से मौजूद ऐप्स को हटाना आसान होगा और अपडेट की डिटेल्स पहले से पता चलेंगी। हालांकि, कंपनियों की चिंता है कि सोर्स कोड तक पहुंच से फोन की परफॉर्मेंस, बैटरी और स्टोरेज प्रभावित हो सकते हैं।

आगे की दिशा:
सरकार इन नियमों को कानूनी रूप देने की तैयारी में है और कंपनियों से बातचीत जारी है। इसके तहत ऑटोमैटिक मैलवेयर स्कैनिंग, अपडेट की जानकारी और कम से कम 12 महीने तक लॉग स्टोर करने जैसी शर्तें लागू हो सकती हैं। अब देखना होगा कि सरकार और कंपनियों के बीच इसका समाधान कैसे निकलता है।

 

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