
नई दिल्ली। देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भारत में लिथियम-आयन बैटरी सेल बनाने की अपनी योजना फिलहाल रोक दी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इसकी वजह चीन से जरूरी तकनीक का न मिलना है।
चीन ने रोक दिया रास्ता
रिलायंस इस साल से बैटरी सेल निर्माण शुरू करना चाहती थी। इसके लिए वह चीन की Xiamen Hithium Energy Storage Technology Co. से तकनीक लाइसेंस पर लेने की कोशिश कर रही थी, लेकिन ये बातचीत रुक गई। चीन ने कई रणनीतिक तकनीक के आयात पर नए नियम लागू कर दिए हैं ताकि अपनी क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी में वैश्विक बढ़त बरकरार रख सके।
रिलायंस की स्थिति
सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज कंटेनर असेंबली और सेल प्रोडक्शन के लिए कुछ मशीनरी आयात कर ली है। लेकिन चीनी तकनीक तक पहुंच न होने के कारण सेल निर्माण रुका हुआ है। अब कंपनी बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) पर ध्यान दे रही है, जो उसकी रिन्यूएबल पावर परियोजनाओं के लिए ऊर्जा स्टोर करेगा।
रिलायंस के प्रवक्ता ने कहा, “BESS मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी पैक मैन्युफैक्चरिंग और सेल मैन्युफैक्चरिंग हमेशा हमारी एनर्जी स्टोरेज योजनाओं का हिस्सा रहे हैं और हम इन्हें लागू करने में अच्छी प्रगति कर रहे हैं।”
अरबों का निवेश और गीगाफैक्ट्री
मुकेश अंबानी ने पिछले अगस्त में शेयरधारकों को बताया था कि रिलायंस की बैटरी बनाने वाली गीगाफैक्ट्री 2026 में शुरू होगी। यह ग्रीन एनर्जी बिजनेस में 10 अरब डॉलर के निवेश का हिस्सा है। हालांकि चीन की तकनीक उपलब्ध न होने से लागत बढ़ने और जोखिम अधिक होने के कारण यह परियोजना फिलहाल रुकी है।
अन्य विकल्पों का मूल्यांकन
रिलायंस ने जापान, यूरोप और दक्षिण कोरिया की वैकल्पिक तकनीकों का भी अध्ययन किया, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर भारत में इस्तेमाल के लिए महंगा और कम प्रतिस्पर्धी पाया गया। भारत अपनी स्थानीय बैटरी निर्माण क्षमता बढ़ाने का प्रयास कर रहा है और 2022 में रिलायंस न्यू एनर्जी ने प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) प्रोग्राम के तहत बैटरी सेल प्लांट बनाने की बोली जीती थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की तकनीकी रोक के बावजूद, रिलायंस का ध्यान स्थानीय और वैकल्पिक तकनीकों पर बढ़ेगा और कंपनी जल्द ही भारत में ग्रीन एनर्जी और बैटरी निर्माण के क्षेत्र में आगे बढ़ेगी।