Monday, January 12

ईरान ने टेके घुटने? ट्रंप का बड़ा दावा—अमेरिका से समझौता चाहता है तेहरान, प्रदर्शन के बीच वार्ता की तैयारी

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए संपर्क किया है और दबाव से थककर अब समझौते की राह तलाश रहा है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ईरान में पिछले दो हफ्तों से अधिक समय से सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं और देश गंभीर अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है।

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ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने अमेरिका के साथ वार्ता के लिए फोन किया है और बैठक की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा, “मुझे लगता है कि वे अमेरिका से पिटकर थक चुके हैं।” हालांकि ट्रंप ने यह चेतावनी भी दी कि यदि बातचीत से पहले कोई “बुरी घटना” होती है तो अमेरिका कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने ईरान के विपक्षी नेताओं के संपर्क में होने का भी दावा किया।

रुख में बदलाव के संकेत
ईरान में प्रदर्शन शुरू होने के बाद से ट्रंप लगातार आक्रामक बयान देते रहे हैं। उन्होंने इन प्रदर्शनों को “आजादी की लड़ाई” बताते हुए प्रदर्शनकारियों का खुला समर्थन किया और ईरान को चेतावनी दी कि विरोध को दबाने की कोशिशों का जवाब दिया जाएगा। यहां तक कि सैन्य कार्रवाई की धमकी भी दी गई।
लेकिन सोमवार को ट्रंप के बयान में नरमी के संकेत दिखे। अब उन्होंने ईरान के साथ बातचीत और समझौते की संभावना पर जोर दिया है। यदि ट्रंप के दावे सही माने जाएं, तो अब तक सख्त तेवर दिखा रहा तेहरान भी नरम पड़ता नजर आ रहा है।

प्रदर्शन, हिंसा और बढ़ता संकट
ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा की गिरावट के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन अब सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सत्ता को चुनौती देने वाले आंदोलन में बदल चुके हैं। यह विरोध देश के लगभग सभी बड़े शहरों तक फैल चुका है।
सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में अब तक 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें करीब 50 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा ने हालात को और गंभीर बना दिया है।

ईरानी सरकार का बयान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि सरकार प्रदर्शनकारियों की बात सुनने को तैयार है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “लोगों की चिंताओं का समाधान करना हमारा कर्तव्य है, लेकिन दंगाइयों को पूरे समाज को तबाह करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।” उन्होंने आगजनी और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत भी दिए।

अगला कदम क्या?
एक ओर अमेरिका दबाव और धमकी की नीति पर कायम है, तो दूसरी ओर बातचीत की पहल की बात भी कर रहा है। ऐसे में सवाल यही है—क्या ईरान वाकई समझौते की ओर बढ़ रहा है, या यह कूटनीतिक दांव-पेंच का नया दौर है? आने वाले दिन तय करेंगे कि वाशिंगटन-तेहरान के रिश्ते टकराव की राह पर जाएंगे या वार्ता की मेज पर।

 

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