Saturday, January 10

सर्दियों के लड्डू: सेहत का खज़ाना या बीमारी की वजह? तिल, मेथी, अलसी, गोंद और ड्राई फ्रूट्स के लड्डू खाते समय इन गलतियों से बचें, वरना बिगड़ सकती है सेहत

सर्दियों का मौसम आते ही घर-घर में तिल, मेथी, अलसी, गोंद और ड्राई फ्रूट्स से बने लड्डुओं की खुशबू फैलने लगती है। परंपरागत रूप से इन्हें शरीर को गर्म रखने और ताकत देने वाला आहार माना जाता है। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो गलत तरीके से बनाए गए या जरूरत से ज्यादा खाए गए लड्डू फायदे की जगह नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

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दरअसल, सर्दियों में बाहर का तापमान गिरने पर शरीर को अंदर से गर्म रखने के लिए ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए हमारी परंपरा में खास किस्म के लड्डुओं का चलन रहा है। मगर स्वाद बढ़ाने की होड़ में जब इनमें जरूरत से ज्यादा घी, चीनी या गुड़ मिला दिया जाता है, तब यही हेल्दी फूड सेहत के लिए भारी पड़ने लगता है।

मात्रा और समय सबसे ज़रूरी

विशेषज्ञों के अनुसार—

  • दिन में एक छोटा लड्डू ही पर्याप्त है।
  • इन्हें सुबह नाश्ते के बाद या दोपहर तक खाना बेहतर रहता है।
  • रात में लड्डू खाने से बचें, क्योंकि ये भारी होते हैं और पाचन बिगाड़ सकते हैं।
  • एक ही तरह के लड्डू रोज़ न खाएं, 3–4 किस्म के लड्डू बदल-बदलकर लें।
  • गैस, एसिडिटी या ब्लोटिंग की समस्या हो तो इनसे दूरी बनाए रखें।
  • कमजोर पाचन वाले बच्चे और बुजुर्ग इन्हें सीमित मात्रा में ही लें।

लड्डू बनाते समय होने वाली आम गलतियां

  • लड्डू बांधने के लिए घी की जरूरत से ज्यादा मात्रा का इस्तेमाल
  • यह मान लेना कि गुड़ डालने से लड्डू पूरी तरह सुरक्षित हो गया, जबकि डायबिटीज़ वालों के लिए गुड़ भी नुकसानदेह हो सकता है
  • शुगर, लिवर या किडनी के मरीजों का डॉक्टर की सलाह के बिना सेवन
  • इन्हें हल्का स्नैक समझना, जबकि ये दरअसल सर्दियों की दवा की तरह होते हैं
  • मिलावटी खोआ या खराब क्वालिटी के ड्राई फ्रूट्स का उपयोग

चीनी-गुड़ की जगह क्या लें?

अगर वजन या शुगर कंट्रोल में रखना है तो चीनी और गुड़ से बचना चाहिए।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खजूर, किशमिश, मुनक्का और अंजीर के पेस्ट से लड्डुओं में प्राकृतिक मिठास लाई जा सकती है। इससे स्वाद भले थोड़ा कम मीठा लगे, लेकिन सेहत सुरक्षित रहती है।

 

कौन-सा लड्डू किसके लिए सही?

■ तिल के लड्डू

कैल्शियम, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर तिल हड्डियों, त्वचा और इम्युनिटी के लिए फायदेमंद है।
लेकिन लिवर-किडनी के गंभीर मरीज, लो बीपी और डायबिटीज़ वाले गुड़-तिल लड्डू से बचें।

■ मेथी के लड्डू

शुगर कंट्रोल और खून साफ रखने में मददगार।
लेकिन ज्यादा मात्रा में लेने से गैस, एसिडिटी और लो ब्लड शुगर की समस्या हो सकती है।

■ अलसी (फ्लैक्स सीड) के लड्डू

ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत, दिल के लिए फायदेमंद।
लेकिन किडनी रोगियों और कमजोर हड्डियों वालों को सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।

■ ड्राई फ्रूट्स के लड्डू

ऊर्जा और पोषण से भरपूर, पर बेहद भारी।
जरूरत से ज्यादा सेवन कब्ज, वजन बढ़ने और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की वजह बन सकता है।

■ गोंद के लड्डू

अत्यधिक गर्म तासीर वाले, जोड़ों और सर्द इलाकों में रहने वालों के लिए उपयोगी।
लेकिन फैटी लिवर, किडनी रोग, शुगर और हाई बीपी वालों के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं।

 

विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों के लड्डू स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सही मात्रा में औषधि की तरह खाए जाएं। जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर यही परंपरागत आहार बीमारी का कारण बन सकता है।

निष्कर्ष:
लड्डू सर्दियों का पोषणयुक्त उपहार हैं, लेकिन तभी जब इन्हें सही सामग्री, सही मात्रा और सही समय पर खाया जाए। वरना “सेहत के लड्डू” धीरे-धीरे सेहत बिगाड़ने की वजह भी बन सकते हैं।

 

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