
भोपाल: मध्यप्रदेश में आगामी प्रशासनिक तबादले अब केवल रूटीन प्रक्रिया नहीं रहेंगे, बल्कि अधिकारियों के वर्क परफॉर्मेंस और कार्यशैली का असली परीक्षण होंगे। राज्य सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि अब सिफारिश या वरिष्ठता के बजाय अधिकारियों की दक्षता और परिणामोन्मुखी कार्यशैली को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए मंत्रालय स्तर पर अफसरों का विस्तृत 85 बिंदुओं वाला रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा रहा है, जो उनकी अगली पदस्थापना तय करेगा।
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने 15 जनवरी को सभी कलेक्टरों, कमिश्नरों और नगर निगम आयुक्तों की अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में अधिकारियों के विकास कार्यों की गति, जन समस्याओं का समाधान, सरकार की प्राथमिकताओं को लागू करने की क्षमता जैसे मानकों पर चर्चा होगी। शासन की मंशा साफ है कि जिन अधिकारियों का प्रदर्शन शानदार और परिणामोन्मुखी रहा है, उन्हें महत्वपूर्ण जिलों और विभागों की जिम्मेदारी दी जाएगी।
मंत्रालय से मैदान तक कसावट की तैयारी
नए साल में प्रमोशन पाने वाले अधिकारियों को फिलहाल उनके पुराने पदों पर रखा गया है, लेकिन जल्द ही परफॉर्मेंस ऑडिट के आधार पर उनकी नई जिम्मेदारी तय की जाएगी। मंत्रालय स्तर पर बेहतर ट्रैक रिकॉर्ड रखने वाले अधिकारियों को सचिव या अपर सचिव पद पर नियुक्त किया जा सकता है, जबकि फील्ड में उत्कृष्ट प्रबंधन दिखाने वाले युवा अधिकारियों को बड़े जिलों की कमान सौंपी जाएगी।
फरवरी में दिखेगा मैदानी बदलाव का असर
नई पोस्टिंग के आदेश जल्द ही जारी हो सकते हैं, लेकिन कलेक्टरों और जिला पंचायत सीईओ की अंतिम सूची 21 फरवरी के बाद आने की संभावना है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य संपन्न होते ही दो साल का कार्यकाल पूरा करने वाले या जिनका वर्क परफॉर्मेंस अपेक्षाओं के अनुसार नहीं रहा, उन्हें विदाई दी जाएगी।
राज्य सरकार की इस रणनीति से स्पष्ट है कि अब केवल पद पर बने रहना पर्याप्त नहीं होगा। बेहतर पोस्टिंग के लिए अधिकारियों को अपनी कार्यकुशलता और परिणामोन्मुखी नेतृत्व साबित करना होगा।