Saturday, May 23

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कुत्ते के काटने से युवक की रेबीज से मौत, स्वास्थ्य विभाग ने जागरूकता बढ़ाने की अपील की

खरगोन, मध्य प्रदेश: झिरनिया क्षेत्र के ग्राम शाहपुरा के 32 वर्षीय अमास्या सोलंकी की एक पपी (कुत्ते के बच्चे) के काटने के एक माह बाद रेबीज के लक्षण उभरने के कारण मौत हो गई। युवक ने कुत्ते के काटने को हल्के में लिया और कोई चिकित्सीय उपचार नहीं कराया।

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झिरनिया के चीफ ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. दीपक शस्त्रे ने बताया कि 5 जनवरी को युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई और काटे गए स्थान पर तेज दर्द होने लगा। परिजनों ने उन्हें झिरनिया शासकीय स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहाँ जांच के दौरान हाइड्रोफोबिया (पानी से डर) के लक्षण पाए गए। स्थिति गंभीर होने पर उन्हें पहले खरगोन और फिर इंदौर रेफर किया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

डॉ. शस्त्रे ने बताया कि घटना के बाद कुत्ते की तलाश के लिए स्थानीय अधिकारियों से बातचीत की गई है। साथ ही उन्होंने अपील की है कि यदि वह कुत्ता किसी और को काटे तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर उपचार कराएँ। मृतक के परिजनों का स्वास्थ्य परीक्षण कर काउंसलिंग भी की गई।

प्राथमिक उपचार और सावधानियाँ:
कुत्ते के काटने के बाद घाव को साबुन से धोना और लगातार बहते पानी से साफ करना बेहद जरूरी है। इससे वायरल लोड 70 प्रतिशत तक कम हो जाता है। इसके बाद एंटी-रेबीज वैक्सीन और आवश्यक चिकित्सीय उपचार अवश्य कराएँ।

खरगोन में डॉग बाइट के मामले:
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, खरगोन जिले में सालाना औसतन 5-6 हजार डॉग बाइट के मामले दर्ज होते हैं। इनमें से कई लोग समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाते, जिससे जीवन जोखिम में पड़ सकता है। जिले में प्रतिमाह लगभग 400 मामलों की रिपोर्ट आती है।

जिला कलेक्टर भव्या मित्तल ने स्वास्थ्य विभाग को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, “कुत्ते के काटने की किसी भी घटना को हल्के में न लें। समय पर इलाज न कराने पर रेबीज से बचना लगभग असंभव है।”

 

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